नीतीश कुमार का पुराना अंदाज़ समृद्धि यात्रा में जब लालू-राबड़ी राज को लेकर छलका उनका दर्द

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News India Live, Digital Desk: बिहार की राजनीति में इन दिनों एक नाम की सबसे ज्यादा चर्चा है  मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और उनकी 'समृद्धि यात्रा'। यह यात्रा केवल विकास कार्यों के निरीक्षण के लिए नहीं है, बल्कि इसके जरिए नीतीश जी लोगों को बिहार का वो 'बीता हुआ कल' भी याद दिला रहे हैं, जिसे शायद नई पीढ़ी नहीं जानती।

हाल ही में अपनी जनसभा के दौरान नीतीश कुमार का एक नया और तीखा तेवर देखने को मिला। उन्होंने किसी का नाम लिए बिना सीधा हमला बोला लालू यादव और राबड़ी देवी के शासनकाल पर। चलिए जानते हैं कि उन्होंने मंच से ऐसी क्या बातें कहीं जिससे बिहार की सियासत में हलचल तेज हो गई है।

"रात में कोई घर से बाहर नहीं निकलता था"
नीतीश कुमार ने सहरसा और मधेपुरा के इलाकों में लोगों को संबोधित करते हुए पुराने दिनों की याद दिलाई। उन्होंने बड़े ही सहज अंदाज़ में लोगों से पूछा "क्या आपको याद है कि 2005 से पहले बिहार कैसा था?" उन्होंने बताया कि कैसे शाम होने के बाद लोग डर के मारे घरों में दुबक जाते थे, न सड़कें थीं, न बिजली और न ही कानून का डर। नीतीश जी का कहना था कि उन्होंने पिछले 18-19 सालों में खून-पसीना एक करके उस बिहार को आज इस मुकाम पर पहुँचाया है जहाँ लड़कियां बेखौफ स्कूल जा पा रही हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दिल खोलकर तारीफ
इस यात्रा की एक खास बात यह भी रही कि नीतीश कुमार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रति काफी आक्रामक रूप से सकारात्मक दिखे। उन्होंने बार-बार इस बात पर जोर दिया कि बिहार के विकास में केंद्र सरकार का बहुत बड़ा हाथ है। उन्होंने साफ कहा— "आज जो सड़कों और पुलों का जाल आप देख रहे हैं, उसमें पीएम मोदी का बड़ा सहयोग है।" यह बयान साफ़ संकेत देता है कि आने वाले समय में जेडीयू और बीजेपी का यह 'डबल इंजन' और भी मज़बूती से साथ चलने वाला है।

विरोधियों पर वार: "वे सिर्फ अपनी चिंता करते हैं"
नीतीश कुमार ने विपक्ष (RJD) पर निशाना साधते हुए कहा कि कुछ लोग केवल अपने परिवार और कुर्सी के लिए परेशान रहते हैं, जबकि उनका अपना पूरा जीवन बिहार के कल्याण में लगा है। उन्होंने कहा कि पहले केवल 'भर्ती' के नाम पर डराया जाता था, लेकिन आज उनकी सरकार रिकॉर्ड स्तर पर नौकरियाँ दे रही है और व्यवस्था में पारदर्शिता ला रही है।

समृद्धि यात्रा का असली संदेश
देखा जाए तो इस यात्रा के ज़रिए नीतीश कुमार 2025 के विधानसभा चुनाव की जमीन तैयार कर रहे हैं। वे जनता को ये एहसास कराना चाहते हैं कि विकास और शांति का जो माहौल आज है, उसे बचाए रखना क्यों ज़रूरी है। उनकी ये बातें सीधे उन वोटरों से जुड़ रही हैं जिन्होंने पिछले दो दशकों में बिहार को बदलते देखा है।

सोशल मीडिया और राजनीति के जानकार मान रहे हैं कि नीतीश कुमार ने एक बार फिर पुराने ज़ख्मों को कुरेदकर विपक्ष को रक्षात्मक (Defensive) स्थिति में ला खड़ा किया है।

आपका क्या सोचना है? क्या वाकई बिहार ने 2005 के बाद एक बड़ा बदलाव देखा है, या अभी भी बहुत कुछ होना बाकी है? हमें कमेंट में अपनी राय ज़रूर दें!