हिजाब विवाद के बीच नीतीश सरकार ने दी बड़ी राहत, क्या अब खत्म होगा सारा सस्पेंस?
News India Live, Digital Desk : बिहार की राजनीति और प्रशासनिक गलियारों में पिछले कुछ दिनों से डॉ. नुसरत का नाम काफी चर्चा में है। जो लोग खबरें पढ़ते हैं, उन्हें याद होगा कि कैसे कुछ समय पहले उनके हिजाब को लेकर काफी शोर मचा था और मामला चर्चा का विषय बन गया था। लेकिन अब उस पुरानी तल्खी को पीछे छोड़ते हुए एक ताज़ा और सकारात्मक अपडेट सामने आया है।
दरअसल, बिहार की नीतीश सरकार ने एक ऐसा कदम उठाया है जिससे डॉ. नुसरत के करियर की अटकी हुई गाड़ी को फिर से रफ़्तार मिल सकती है। स्वास्थ्य विभाग ने आयुष (AYUSH) डॉक्टरों की जॉइनिंग को लेकर तारीख आगे बढ़ा दी है। आसान शब्दों में कहें तो डॉ. नुसरत को एक और मौका मिल गया है कि वह अपनी सेवाएँ सरकार को दे सकें।
क्या था मामला?
बिहार में जब आयुष डॉक्टरों की बहाली शुरू हुई, तब डॉ. नुसरत चर्चा में आईं। उस समय ऐसी खबरें आई थीं कि जॉइनिंग के दौरान या काउंसलिंग की प्रक्रिया में उन्हें अपनी 'धार्मिक पहचान' या हिजाब को लेकर कुछ परेशानियों का सामना करना पड़ा। सोशल मीडिया और मीडिया के कैमरों ने इस खबर को खूब पकड़ा। नियमों की अपनी दलील थी और आस्था की अपनी। इसके बाद जब पहली जॉइनिंग की समय-सीमा खत्म हुई और डॉ. नुसरत ड्यूटी पर नहीं पहुँच पाईं, तो ऐसा लगने लगा कि शायद उनका यह सरकारी सपना अब अधूरा ही रह जाएगा।
नीतीश सरकार का बड़ा फैसला
अक्सर देखा जाता है कि सरकारी विभागों में अगर जॉइनिंग की आखिरी तारीख बीत जाए, तो मामला फिर फाइलों के चक्कर में ही फँसा रहता है। लेकिन नीतीश सरकार ने इस मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए, उन सभी डॉक्टरों के लिए समय बढ़ा दिया है जिन्होंने किसी न किसी वजह से अभी तक जॉइन नहीं किया था। डॉ. नुसरत के लिए यह किसी बड़े तोहफे से कम नहीं है, क्योंकि उनके मामले को एक विशेष नजरिये से देखा जा रहा था।
राजनीतिक और सामाजिक असर
2026 के इस दौर में, जब देश में सामाजिक समरसता को लेकर हर तरफ चर्चा होती है, बिहार सरकार का यह फैसला एक सधा हुआ संदेश है। विपक्ष जहाँ अक्सर इन मुद्दों पर सरकार को घेरता रहा है, वहीं जॉइनिंग की तारीख बढ़ने से अब राजनीति के सुर भी थोड़े नरम पड़े हैं। जानकारों का कहना है कि यह केवल डॉ. नुसरत का मामला नहीं है, बल्कि बिहार में भर्ती प्रक्रिया की पारदर्शिता और लचीलेपन (flexibility) का एक नमूना है।
अब आगे क्या?
डॉ. नुसरत के पास अब अपनी सरकारी ड्यूटी पर तैनात होने के लिए पर्याप्त समय है। यह देखना दिलचस्प होगा कि वह इस मौके को कितनी जल्दी भुनाती हैं। उनके चाहने वाले और समाज का एक बड़ा वर्ग इस बात से खुश है कि एक काबिल डॉक्टर की डिग्री और उनकी सालों की मेहनत सिर्फ एक विवाद की वजह से बर्बाद नहीं होगी।