जमशेदपुर में बुलडोजर की दस्तक साकची की 27 दुकानों पर मंडराया ख़तरा, जानिए आख़िर प्रशासन क्यों ले रहा है ये सख्त एक्शन?
News India Live, Digital Desk : जमशेदपुर की पहचान उसके टाटा स्टील प्लांट के अलावा यहाँ की व्यवस्थित मार्केट से भी है। साकची यहाँ की जान है, जहाँ हजारों लोग हर दिन खरीदारी करने पहुँचते हैं। लेकिन यही भीड़ अब एक बड़ी मुसीबत बन गई है और वह है ट्रैफिक और पार्किंग।
नक्शे में कुछ और, ज़मीन पर कुछ और!
प्रशासन (JNAC - जमशेदपुर अक्षेस) की जांच में ये सामने आया कि इन 27 दुकानों ने 'बिल्डिंग बायलॉज' की जमकर धज्जियां उड़ाई हैं। नियमों के मुताबिक, इन इमारतों के निचले हिस्से यानी बेसमेंट को पार्किंग के लिए इस्तेमाल किया जाना था। लेकिन मुनाफे के चक्कर में वहां छोटी-छोटी दुकानें बना दी गईं। नतीजा ये हुआ कि ग्राहक अपनी गाड़ियां सड़क पर खड़ी करने लगे और शहर में जाम लगने लगा।
नोटिस की मियाद खत्म, अब डंडे की बारी!
दुकानदारों का कहना है कि वे सालों से यहाँ अपना व्यापार कर रहे हैं और अचानक उन्हें हटाना उनके साथ नाइंसाफी है। हालांकि, प्रशासन की दलील बड़ी साफ है— 'अतिक्रमण पर समझौता नहीं होगा'। इन दुकानदारों को कई बार नोटिस दिया गया, सुनवाई का मौका दिया गया, लेकिन कोई पुख्ता समाधान नहीं निकला। अब JNAC ने पुलिस फोर्स के साथ बुलडोजर चलाने की पूरी तैयारी कर ली है।
आम जनता का मिला-जुला रिएक्शन
शहर के वो लोग जो रोज़ाना साकची के जाम से परेशान होते हैं, वे इस कार्रवाई को सही बता रहे हैं। उनका मानना है कि पार्किंग खुलेगी तो ट्रैफिक कम होगा। वहीं, स्थानीय लोग और व्यापारी संगठन इस बात से चिंतित हैं कि 27 परिवारों का भविष्य और निवेश मिट्टी में मिल जाएगा।
आगे क्या होगा?
जमशेदपुर के प्रशासनिक गलियारों में फाइलें तेज़ी से दौड़ रही हैं। बताया जा रहा है कि एक टीम बनाई गई है जो साकची ही नहीं, बल्कि मानगो और गोलमुरी जैसे इलाकों में भी उन नक्शों की जांच करेगी जहाँ पार्किंग के लिए तय जगह पर दुकानें सजी हैं।
अभी माहौल काफी गरम है और आने वाले एक-दो दिन जमशेदपुर की सड़कों और दुकानदारों के भविष्य के लिए काफी अहम होने वाले हैं। उम्मीद यही है कि प्रशासन नियमों और इंसानी संवेदनाओं के बीच का कोई बीच का रास्ता निकालने की कोशिश करे, लेकिन फिलहाल तो हवा 'बुलडोजर' की तरफ ही बह रही है।