भारत-चीन संबंधों में नया ट्विस्ट? चीन ने कहा भारत से रिश्ता लंबी रेस का, अमेरिकी दखल पर जताई कड़ी आपत्ति

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News India Live, Digital Desk : अभी पिछले दिनों अमेरिका के रक्षा विभाग (पेंटागन) ने एक ऐसी रिपोर्ट जारी की थी जिसने भारत की चिंताएं बढ़ा दी थीं. इस रिपोर्ट में कहा गया था कि चीन भारत के पड़ोसी देशों, जैसे बांग्लादेश, श्रीलंका और म्यांमार में सैन्य ठिकाने बनाने की फिराक में है. अब इस पर चीन ने अपनी चुप्पी तोड़ी है और अमेरिका को आड़े हाथों लिया है! चीन का कहना है कि वह भारत के साथ अपने रिश्तों को सिर्फ आज के लिए नहीं, बल्कि लंबी अवधि के रणनीतिक दृष्टिकोण से देखता है. साथ ही, उसने अमेरिका पर भारत और चीन के बीच अविश्वास पैदा करने का भी आरोप लगाया है. [SEO Keywords: भारत-चीन संबंध, अमेरिकी रिपोर्ट चीन, चीन का बयान, सामरिक साझेदारी, भू-राजनीतिक]

क्या कहा है चीन ने अमेरिकी रिपोर्ट पर?

अमेरिकी रक्षा रिपोर्ट आने के बाद चीन के विदेश मंत्रालय के एक प्रवक्ता ने इस पर अपनी प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने साफ कहा है कि भारत के साथ अपने संबंधों को वे दूरगामी और रणनीतिक नज़रिए से देखते हैं. इसका मतलब है कि चीन अपनी पॉलिसी और एक्शन को सिर्फ तात्कालिक फायदे के लिए नहीं, बल्कि भविष्य के संबंधों को ध्यान में रखकर बनाता है. प्रवक्ता ने यह भी कहा कि भारत और चीन के बीच रिश्ते शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व के पांच सिद्धांतों पर आधारित होने चाहिए. [SEO Keywords: चीन विदेश मंत्रालय, भारत चीन कूटनीति, पंचशील सिद्धांत, चीन का रुख]

अमेरिका पर साधा निशाना!

सिर्फ अपनी बात रखकर चीन चुप नहीं बैठा. उसने इस पूरे विवाद में अमेरिका पर ही सीधा आरोप लगा दिया. चीन का कहना है कि अमेरिकी रिपोर्टें निराधार हैं और उनका मकसद सिर्फ़ भारत और चीन के बीच मतभेद पैदा करना, संदेह पैदा करना और आपस में अविश्वास बढ़ाना है. चीन का मानना है कि अमेरिका इस तरह की रिपोर्टों से दोनों एशियाई ताकतों को आपस में लड़ाकर अपनी रणनीतिक स्थिति को मज़बूत करना चाहता है. चीन के प्रवक्ता ने तो यह तक कह दिया कि एशिया क्षेत्र में शांति और स्थिरता को बनाए रखने के लिए किसी बाहरी देश की दखलंदाजी स्वीकार नहीं की जा सकती. [SEO Keywords: अमेरिका चीन संबंध, भारत चीन तनाव, बाहरी दखलंदाजी, एशिया शांति]

क्या यह सिर्फ़ शब्दों का खेल है?

इस पूरे घटनाक्रम से एक बात तो साफ है कि हिंद-प्रशांत क्षेत्र और दक्षिण एशिया में रणनीतिक प्रतिद्वंद्विता बढ़ती जा रही है. चीन जहां अपनी बढ़ती वैश्विक शक्ति को स्थापित करना चाहता है, वहीं अमेरिका इसे रोकने की कोशिश में लगा है. इन दोनों के बीच भारत एक अहम ध्रुव बन जाता है. चीन का यह बयान सिर्फ बातों का फेर नहीं, बल्कि उसकी बड़ी रणनीति का एक हिस्सा हो सकता है, जहाँ वह एक तरफ भारत को शांत करने की कोशिश कर रहा है, तो दूसरी तरफ अमेरिका को दोषी ठहरा रहा है. अब देखना ये है कि भविष्य में ये बयान और ये रणनीतियाँ ज़मीन पर क्या रंग दिखाती हैं. [SEO Keywords: हिंद-प्रशांत क्षेत्र, वैश्विक शक्ति संतुलन, चीन की रणनीति, भारत की भूमिका]

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