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April 14 2026 07:35 pm

Muzaffarnagar Horror: लिव-इन पार्टनर की बेरहमी! बेटे के हक के लिए अड़ी मां, तो प्रेमी ने चेहरे पर किए अनगिनत वार

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News India Live, Digital Desk: उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जिले में एक ऐसी वारदात को अंजाम दिया गया जिसने रिश्तों को शर्मसार कर दिया है। एक युवक ने अपनी लिव-इन पार्टनर की सिर्फ इसलिए बेरहमी से हत्या कर दी क्योंकि वह अपने मासूम बेटे के अधिकारों और पहचान के लिए कानूनी हक मांग रही थी। हत्यारे ने पहचान मिटाने के लिए महिला के चेहरे को बुरी तरह क्षत-विक्षत कर दिया था, लेकिन कुदरत का करिश्मा देखिए कि चेहरे पर मौजूद एक 'तिल' ने पुलिस को कातिल तक पहुँचा दिया।

लिव-इन से शुरू हुआ सफर, खौफनाक अंत तक पहुँचा

पुलिस जांच में सामने आया कि मृतका कविता (नाम परिवर्तित) पिछले कुछ समय से आरोपी युवक के साथ लिव-इन रिलेशनशिप में रह रही थी। इस दौरान उनका एक बेटा भी हुआ। कविता लगातार अपने साथी पर दबाव बना रही थी कि वह बच्चे को अपना नाम दे और उसे कानूनी अधिकार सुरक्षित करने के लिए जरूरी दस्तावेज तैयार करवाए। यही मांग आरोपी को नागवार गुजरी और उसने कविता को रास्ते से हटाने की साजिश रच डाली।

चेहरे पर वार: पहचान मिटाने की नाकाम कोशिश

आरोपी ने कविता की हत्या करने के बाद उसके चेहरे पर भारी हथियार से कई वार किए ताकि पुलिस उसकी शिनाख्त न कर सके। शव मिलने के बाद पुलिस के लिए सबसे बड़ी चुनौती मृतका की पहचान करना था। हालांकि, फोरेंसिक जांच और स्थानीय इनपुट के आधार पर महिला के चेहरे के पास मौजूद एक विशिष्ट 'मस्से (Mole)' ने उसकी पहचान सुनिश्चित की।

पुलिसिया कार्रवाई: तिल ने कैसे खोला राज?

गुमशुदगी और शिनाख्त: जब कविता कई दिनों तक नहीं दिखी, तो उसके परिजनों ने तलाश शुरू की। पुलिस को मिले अज्ञात शव के फोटो जब दिखाए गए, तो चेहरे की चोटों के बावजूद उस 'तिल' ने परिवार को पहचान करने में मदद की।

प्रेमी का कबूलनामा: पुलिस ने जब प्रेमी को हिरासत में लेकर कड़ाई से पूछताछ की, तो वह टूट गया। उसने स्वीकार किया कि बच्चे के भविष्य और शादी के दबाव के कारण उसने इस वारदात को अंजाम दिया।

कानूनी धाराएं: आरोपी के खिलाफ हत्या (धारा 302) और साक्ष्य मिटाने की धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज कर उसे जेल भेज दिया गया है।

मासूम का क्या होगा?

इस खौफनाक वारदात ने एक मासूम बच्चे के सिर से मां का साया छीन लिया और पिता जेल की सलाखों के पीछे पहुँच गया। बच्चे के भविष्य को लेकर अब प्रशासन और समाज कल्याण विभाग विचार कर रहा है।