Mission Naxal-Free India : बजट 2026 में लाल आतंक पर अंतिम प्रहार फंड में 20% का भारी इजाफा

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News India Live, Digital Desk : देश को नक्सलवाद के अभिशाप से मुक्त करने के लिए मोदी सरकार ने अपने बजट 2026-27 में एक निर्णायक कदम उठाया है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने वामपंथी उग्रवाद (LWE) से निपटने के लिए सुरक्षा और बुनियादी ढांचे के बजट में 20 प्रतिशत से अधिक की बढ़ोतरी की घोषणा की है। सरकार का स्पष्ट लक्ष्य है कि 31 मार्च 2026 तक भारत की धरती से नक्सलवाद का नामोनिशान मिटा दिया जाए।

आंकड़ों में समझें: सुरक्षा पर कितना खर्च?

सरकार ने नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षा और विकास के बीच सामंजस्य बैठाने के लिए भारी निवेश का प्रस्ताव रखा है:

कुल आवंटन: वामपंथी उग्रवाद प्रभावित क्षेत्रों के लिए ₹3,610.80 करोड़ आवंटित किए गए हैं।

बजट में वृद्धि: पिछले वित्त वर्ष के संशोधित अनुमान (₹3,006.56 करोड़) की तुलना में यह 20.09% की बढ़ोतरी है।

पुलिस आधुनिकीकरण: पुलिस बलों के आधुनिकीकरण के लिए कुल आवंटन को भी 24% बढ़ाकर ₹4,061.34 करोड़ कर दिया गया है।

फंड का कहां होगा इस्तेमाल?

बजट दस्तावेज के अनुसार, इस राशि का उपयोग मुख्य रूप से तीन महत्वपूर्ण योजनाओं के तहत किया जाएगा:

सुरक्षा संबंधी व्यय (SRE): इसके तहत राज्यों को सुरक्षा बलों के प्रशिक्षण, परिचालन जरूरतों और उग्रवाद विरोधी अभियानों के लिए वित्तीय सहायता दी जाएगी।

विशेष बुनियादी ढांचा योजना (SIS): नक्सल प्रभावित इलाकों में फोर्टिफाइड पुलिस स्टेशन, सड़कें और संचार तंत्र मजबूत किए जाएंगे।

विशेष केंद्रीय सहायता (SCA): सबसे अधिक प्रभावित 35 जिलों में शिक्षा, स्वास्थ्य और बुनियादी सुविधाओं की कमियों को दूर करने के लिए फंड दिया जाएगा।

अमित शाह का संकल्प: "मार्च 2026 तक नक्सल-मुक्त भारत"

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने पिछले वर्ष ही यह संकल्प दोहराया था कि मार्च 2026 तक देश को नक्सलवाद से पूरी तरह मुक्त कर दिया जाएगा।

सफलता के आंकड़े: 2014 से 2024 के बीच नक्सल हिंसा की घटनाओं में 53% की कमी आई है।

हथियार डालने की लहर: 2025 में रिकॉर्ड 1,225 से अधिक माओवादियों ने आत्मसमर्पण किया है, जिससे यह आंदोलन अपनी अंतिम सांसें गिन रहा है।

विकास की पहुंच: सरकार केवल बंदूक से नहीं, बल्कि सड़क, बैंक, बिजली और मोबाइल टावरों के जरिए 'लाल गलियारे' में लोकतंत्र की जड़ें मजबूत कर रही है।

सिविक एक्शन और मीडिया प्लान

बजट में ₹20 करोड़ का विशेष प्रावधान 'सिविक एक्शन प्रोग्राम' के लिए किया गया है।

इसके तहत सुरक्षा बल (CAPFs) स्थानीय आदिवासी समुदायों के साथ मिलकर कल्याणकारी कार्य करेंगे।

मीडिया प्लान: नक्सलवाद की खोखली विचारधारा के खिलाफ और सरकार की विकास योजनाओं के प्रचार के लिए मीडिया गतिविधियों पर भी जोर दिया जाएगा।