डोटासरा का CM भजनलाल पर बड़ा तंज 60 बार दिल्ली गए मुख्यमंत्री, फिर भी बजट में राजस्थान को मिली फूटी कौड़ी

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News India Live, Digital Desk: केंद्रीय बजट 2026 पेश होने के बाद राजस्थान कांग्रेस के चीफ गोविंद सिंह डोटासरा ने केंद्र सरकार और मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा पर कड़ा प्रहार किया है। डोटासरा ने बजट को राजस्थान के लिए पूरी तरह 'शून्य' और 'निराशाजनक' बताते हुए कहा कि राज्य की "पर्ची सरकार" को इस बार बजट में कोई पर्ची (विशेष रियायत) नहीं मिली। उन्होंने मुख्यमंत्री की बार-बार दिल्ली यात्राओं पर सवाल उठाते हुए इसे राज्य के हितों के साथ खिलवाड़ करार दिया।

"मुख्यमंत्री के 60 दिल्ली दौरे रहे बेअसर": डोटासरा

डोटासरा ने सीकर स्थित अपने आवास पर मीडिया से बातचीत करते हुए मुख्यमंत्री की कार्यशैली पर कटाक्ष किया:

दौरे बनाम परिणाम: डोटासरा ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री पिछले दो वर्षों में कम से कम 60 बार दिल्ली जा चुके हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री और केंद्रीय मंत्रियों से कई मुलाकातें कीं, लेकिन राज्य के लिए ₹1 का भी विशेष पैकेज नहीं ला सके।

फूटी कौड़ी नहीं मिली: पीसीसी चीफ ने चुटकी लेते हुए कहा कि चूंकि राजस्थान में अगले तीन साल तक कोई चुनाव नहीं हैं, इसलिए केंद्र ने राज्य को बजट में "फूटी कौड़ी" भी नहीं दी।

ERCP और मानगढ़ धाम पर वादाखिलाफी का आरोप

डोटासरा ने बजट में राजस्थान की महत्वपूर्ण परियोजनाओं के गायब होने पर नाराजगी जाहिर की:

ERCP की अनदेखी: डोटासरा ने कहा कि चुनाव के समय पूर्वी राजस्थान नहर परियोजना (ERCP) को राष्ट्रीय परियोजना बनाने के बड़े-बड़े वादे किए गए थे, लेकिन बजट में इसका कोई जिक्र नहीं है।

पर्यटन और जल जीवन मिशन: राजस्थान जैसे जल-अभाव वाले राज्य के लिए जल जीवन मिशन और अपार संभावनाओं वाले पर्यटन क्षेत्र के लिए किसी विशेष पैकेज की घोषणा नहीं की गई।

मानगढ़ धाम: आदिवासियों की आस्था के केंद्र मानगढ़ धाम को राष्ट्रीय स्मारक घोषित करने की उम्मीद भी इस बजट में टूट गई।

कर्मचारियों और युवाओं की 'उम्मीदों पर फिरा पानी'

कांग्रेस नेता ने मध्यम वर्ग और युवाओं की समस्याओं को भी प्रमुखता से उठाया:

इनकम टैक्स स्लैब: डोटासरा ने कहा कि कर्मचारी वर्ग को आयकर स्लैब में बड़े बदलाव की उम्मीद थी, क्योंकि बढ़ती महंगाई के कारण "वेतन 15 दिन में ही खत्म हो जाता है", लेकिन उन्हें निराशा हाथ लगी।

बेरोजगारी: दो करोड़ नौकरियों के वादे का क्या हुआ? बजट में रोजगार सृजन का कोई स्पष्ट रोडमैप नहीं है।

शेयर बाजार का संकेत: उन्होंने बजट के बाद शेयर बाजार में आई गिरावट का जिक्र करते हुए कहा कि यह जनता के अविश्वास का सीधा प्रमाण है।