मंत्री जी की चेतावनी हवा-हवाई, माफिया मस्त, बिहार की बागमती नदी पर अतिक्रमण का खौफनाक सच
News India Live, Digital Desk : बिहार में भू-माफियाओं (Land Mafia) के हौसले इतने बुलंद हो चुके हैं कि अब वे सरकारी ज़मीन तो छोड़िए, बहती हुई नदियों को भी नहीं बख्श रहे हैं। ताज़ा मामला बागमती नदी (Bagmati River) का है, जिसका वजूद खतरे में पड़ गया है। बड़ी-बड़ी गाड़ियों में भरकर मिट्टी लाई जा रही है और नदी के किनारों को पाटकर समतल ज़मीन बनाई जा रही है।
सबसे शर्मनाक बात यह है कि सरकार और मंत्री के आदेशों की खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं।
विजय सिन्हा की चेतावनी का कोई असर नहीं
बिहार सरकार के मंत्री विजय कुमार सिन्हा (Vijay Kumar Sinha) ने हाल ही में इस मुद्दे पर सख्त रुख अपनाया था। उन्होंने अधिकारियों को फटकार लगाई थी और माफियाओं को कड़ी चेतावनी दी थी कि "नदी के साथ खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।"
आम जनता को लगा था कि शायद अब एक्शन होगा और बागमती सांस ले पाएगी। लेकिन जमीनी हकीकत देखकर आप भी हैरान रह जाएंगे। मंत्री जी की चेतावनी का माफियाओं पर 'ज़रा सा' भी असर नहीं हुआ। जिस रफ़्तार से पहले नदी को भरा जा रहा था, वह अब और तेज हो गई है। मानो वे प्रशासन को चुनौती दे रहे हों कि "दम है तो रोक लो।"
दिन के उजाले में चल रहा 'खेल'
यह कोई चोरी-छिपे होने वाला काम नहीं है। स्थानीय लोगों की मानें तो दिन के उजाले में ट्रैक्टर और डंपर चलते हैं। नदी के पेट (River bed) को भरकर वहां अवैध कब्जा किया जा रहा है ताकि प्लॉटिंग की जा सके या दुकानें बनाई जा सकें। बागमती, जो उत्तर बिहार की जीवनरेखा मानी जाती है, अब सिकुड़कर नाले जैसी होती जा रही है।
आने वाला खतरा
नदी पर इस तरह के अतिक्रमण का सीधा मतलब है—विनाश को न्योता। बागमती अपनी बाढ़ के लिए बदनाम है। जब आप उसके बहाव के रास्ते को रोककर पक्के निर्माण कर देंगे, तो पानी कहां जाएगा? जाहिर है, वो पानी गाँवों और शहरों में तबाही मचाएगा। यह अतिक्रमण सिर्फ नदी की हत्या नहीं है, बल्कि आने वाले समय में लाखों लोगों को डुबोने की साजिश भी है।
प्रशासन की चुप्पी पर सवाल
लोग अब सवाल पूछ रहे हैं कि जब मंत्री खुद दौरा करके गए, अल्टीमेटम दे गए, फिर भी स्थानीय अधिकारी हाथ पर हाथ धरे क्यों बैठे हैं? क्या यह सब मिलीभगत का नतीजा है?
फिलहाल, बागमती का अस्तित्व दांव पर है। अगर जल्द ही ठोस कार्रवाई नहीं हुई, और सिर्फ़ बयानों का खेल चलता रहा, तो इतिहास किताबों में ही बागमती नदी का नाम रह जाएगा।