Ekadashi 2026 : कब है पापमोचनी एकादशी? जानें सही तिथि और शुभ मुहूर्त, भूलकर भी इस दिन न करें ये 3 काम
News India Live, Digital Desk: हिंदू पंचांग के अनुसार, चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी को 'पापमोचनी एकादशी' कहा जाता है। जैसा कि नाम से ही स्पष्ट है, यह एकादशी व्यक्ति के जाने-अनजाने में किए गए पापों का नाश करने वाली मानी गई है। साल 2026 में इस व्रत को लेकर तिथियों का विशेष संयोग बन रहा है।
पापमोचनी एकादशी 2026: तिथि और मुहूर्त
एकादशी तिथि प्रारंभ: 13 मार्च 2026, शुक्रवार (दोपहर के बाद)
एकादशी तिथि समाप्त: 14 मार्च 2026, शनिवार (दोपहर तक)
व्रत की तिथि: उदया तिथि और वैष्णव परंपरा के अनुसार, पापमोचनी एकादशी का व्रत 14 मार्च 2026, शनिवार को रखा जाएगा।
पारण का समय: व्रत खोलने (पारण) का शुभ समय 15 मार्च 2026 की सुबह सूर्योदय के बाद रहेगा।
बाल धोने और काटने को लेकर क्या है नियम? धार्मिक मान्यताओं और शास्त्रों के अनुसार, एकादशी के दिन कुछ कार्यों को वर्जित माना गया है:
बाल और नाखून न काटें: एकादशी के दिन बाल काटना, नाखून काटना या दाढ़ी बनाना अशुभ माना जाता है। मान्यता है कि इससे घर की बरकत कम होती है।
बाल धोना: सुहागिन महिलाओं और व्रत रखने वालों के लिए एकादशी के दिन सिर धोना (बाल धोना) वर्जित बताया गया है। यदि अनिवार्य हो, तो व्रत से एक दिन पहले (दशमी को) ही बाल धो लेने चाहिए।
चावल का त्याग: इस दिन घर में चावल बनाना और खाना पूरी तरह वर्जित है, चाहे आप व्रत रख रहे हों या नहीं।
इन नियमों का भी रखें ध्यान:
तुलसी दल: एकादशी के दिन तुलसी के पत्ते नहीं तोड़ने चाहिए। पूजा के लिए एक दिन पहले ही पत्ते तोड़कर रख लें।
ब्रह्मचर्य और सात्विकता: इस दिन पूरी तरह सात्विक भोजन करना चाहिए और मन में किसी के प्रति द्वेष या क्रोध नहीं लाना चाहिए।
दान का महत्व: एकादशी के दिन क्षमता अनुसार अन्न, जल या वस्त्र का दान करना बेहद फलदायी होता है।
धार्मिक महत्व भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन को इस एकादशी का महत्व बताते हुए कहा था कि जो व्यक्ति विधि-विधान से पापमोचनी एकादशी का व्रत करता है, उसे हजारों वर्षों की तपस्या के समान फल प्राप्त होता है और वह समस्त मानसिक व शारीरिक कष्टों से मुक्त हो जाता है।