पटना से पूर्णिया और दिल्ली तक का सफर होगा मक्खन ,जानिए बिहार के हाईवे प्रोजेक्ट्स में क्या हुआ बड़ा बदलाव
News India Live, Digital Desk: अक्सर हम बिहार में सड़क किनारे बड़ी-बड़ी मशीनों को काम शुरू करते तो देखते हैं, लेकिन फिर कुछ समय बाद सब थम जाता है। वजह पता चलती है कि ज़मीन नहीं मिली या किसी एक विभाग ने दूसरे विभाग को परमिशन नहीं दी। यह न केवल आम जनता के पैसे की बर्बादी थी बल्कि इससे सफर भी मुश्किल हो रहा था। अब बिहार सरकार और निर्माण से जुड़ी एजेंसियों के बीच एक बहुत ज़रूरी सुलह हो गई है।
विभागों के बीच खत्म हुई तनातनी
हाईवे प्रोजेक्ट्स में अक्सर राजस्व विभाग, वन विभाग और पथ निर्माण विभाग के बीच छोटी-मोटी असहमति के चलते फाइलें एक टेबल से दूसरी टेबल तक ही रह जाती थीं। ताज़ा फैसले के बाद अब ऐसी 'बाधाओं' को एक ही छत के नीचे निपटाने का प्लान तैयार हो गया है। यानी अब किसी सड़क की मंजूरी के लिए फाइलें सालों-साल नहीं लटकेंगी।
ज़मीन का पेच सुलझाना था सबसे बड़ा टास्क
बिहार जैसे राज्य में जहाँ आबादी घनी है, वहां एक्सप्रेसवे के लिए चौड़ी ज़मीन जुटाना एक हिमालय जैसा मुश्किल काम था। लेकिन सरकार ने अब भूमि अधिग्रहण (Land Acquisition) की प्रक्रिया को पारदर्शी बनाया है और किसानों के हितों को ध्यान में रखते हुए मुआवजे की शर्तों को आसान किया है। इससे सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि पटना-पूर्णिया एक्सप्रेसवे, गोरखपुर-सिलिगुड़ी कॉरिडोर और आमस-दरभंगा हाईवे जैसे बड़े प्रोजेक्ट्स अब तेज़ रफ्तार से पूरे हो सकेंगे।
सफर में क्या बदलेगा?
जरा सोचिए, जब बिहार के प्रमुख शहर एक्सप्रेसवे से जुड़ जाएंगे, तो वह व्यापार और रोजगार के नए अवसर लेकर आएंगे। अगर आप पटना से गया जा रहे हैं या भागलपुर की ओर बढ़ रहे हैं, तो घंटों का जाम बीते कल की बात हो जाएगी। सड़कों का नेटवर्क बेहतर होने से किसानों की उपज भी समय पर बड़ी मंडियों तक पहुंच पाएगी।
यह खबर उन लाखों लोगों के लिए एक राहत है जो रोजाना खराब रास्तों या संकरी सड़कों के चलते परेशान होते थे। बिहार में अब सिर्फ योजनाएं बनेंगी नहीं, बल्कि वे समय पर जमीन पर भी दिखेंगी। आने वाले एक-दो साल बिहार के बुनियादी ढांचे (Infrastructure) के लिए बहुत खास होने वाले हैं।