ममता बनर्जी का सीधा प्रहार ,बंगाल पर उंगली उठाने वालों को याद दिलाया पहलगाम

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News India Live, Digital Desk : पश्चिम बंगाल की राजनीति और वहां के मिजाज को समझना कभी आसान नहीं रहा। एक तरफ दिल्ली से अमित शाह हुंकार भरते हैं कि बंगाल में घुसपैठ और आतंकी नेटवर्क बढ़ रहा है, तो दूसरी तरफ ममता बनर्जी अपनी 'दीदी' वाली छवि के साथ पूरी ताकत से पलटवार करती हैं। हाल ही में गृह मंत्री अमित शाह ने बंगाल की कानून-व्यवस्था और आतंकी गतिविधियों पर कुछ कड़े सवाल उठाए, जिसका जवाब ममता बनर्जी ने बहुत ही कड़वे लहजे में दिया है।

अमित शाह के आरोपों पर ममता का वार
दरअसल, गृह मंत्री अमित शाह ने एक रैली या कार्यक्रम के दौरान कहा था कि पश्चिम बंगाल सुरक्षित नहीं रह गया है और वहां आतंकी अपना नेटवर्क फैला रहे हैं। इस पर भड़कते हुए ममता बनर्जी ने कहा, "अमित शाह हर बात के लिए बंगाल को दोषी ठहराते हैं। अगर उनका दावा है कि आतंकवादी बंगाल में पनाह ले रहे हैं या यहां से नेटवर्क चल रहा है, तो फिर पहलगाम (जम्मू-कश्मीर) में जो हमला हुआ, उसकी जिम्मेदारी कौन लेगा? क्या वह हमला आपने खुद करवाया था?"

ममता का यह सवाल काफी तीखा था। उनका कहना है कि जब कश्मीर या देश के अन्य हिस्सों में सुरक्षा में चूक होती है, तब केंद्र अपनी जिम्मेदारी क्यों नहीं समझता? केवल बंगाल को ही निशाना क्यों बनाया जाता है?

आंकड़ों और दावों की जंग
ममता बनर्जी ने अपनी बात को मज़बूती देते हुए यह भी कहा कि पश्चिम बंगाल की पुलिस अपनी सीमाओं की सुरक्षा और राज्य में शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए कड़ी मेहनत कर रही है। उन्होंने केंद्र पर आरोप लगाया कि वह केंद्रीय जांच एजेंसियों और बयानों के ज़रिए बंगाल की छवि को खराब करने की कोशिश कर रहा है। ममता बनर्जी ने यह भी साफ किया कि आतंकवाद एक राष्ट्रीय समस्या है और इस पर राजनीति करना केंद्र को शोभा नहीं देता।

रिश्तों में बढ़ती कड़वाहट
जैसे-जैसे 2026 के चुनावी मोड़ की आहट करीब आएगी, ये बयानबाजी और भी ज़ोर पकड़ेगी। बीजेपी लगातार बंगाल को भ्रष्टाचार और घुसपैठ के मुद्दे पर घेरने की कोशिश करती है, जबकि टीएमसी इसे बंगाल की 'अस्मिता' (Pride) पर हमला बताती है।

पहलगाम जैसे संवेदनशील मुद्दे को इस जुबानी जंग में खींचने से साफ है कि अब लड़ाई मर्यादा के लेवल से बाहर निकल चुकी है। जानकारों का कहना है कि ममता बनर्जी अब 'डिफेंस' करने के बजाय 'अटैक' मोड में आ चुकी हैं और वह दिल्ली को उन्हीं के स्टाइल में जवाब देना जानती हैं।

इस पूरी जंग में सबसे बड़ा सवाल यही है क्या सुरक्षा जैसे गंभीर मुद्दों पर केंद्र और राज्य का तालमेल सिर्फ राजनीति की भेंट चढ़ जाएगा