राजस्थान NSUI में सिर-फुटौव्वल? नई नियुक्ति के साथ ही विवादों की एंट्री, दिल्ली से आया कड़ा संदेश
News India Live, Digital Desk : अक्सर कहा जाता है कि एकता में शक्ति है, लेकिन जब बात राजनीति की आती है, तो 'एकता' ढूंढना थोड़ा मुश्किल हो जाता है। राजस्थान में छात्र राजनीति का पारा हमेशा चढ़ा रहता है और ताज़ा विवाद ने इसमें और घी डालने का काम किया है। राजस्थान NSUI अध्यक्ष की नियुक्ति को लेकर जो रस्साकशी चल रही थी, वह अब नोटिस (Notice) तक जा पहुँची है।
मामला तब गरमाया जब नई नियुक्तियों और फैसलों पर संगठन के भीतर से ही विरोध के स्वर उठने लगे। सियासत की गलियों में चर्चा है कि नियुक्तियों में कुछ ऐसी प्रक्रिया अपनाई गई जिससे संगठन का एक बड़ा धड़ा नाराज चल रहा है। बात सिर्फ जुबानी जंग तक ही नहीं रही, बल्कि ऊपर तक जा पहुँची है। दिल्ली दरबार से इस पूरे मामले पर जानकारी मांगी गई है और कुछ खास लोगों को नोटिस थमा दिए गए हैं।
अब सवाल ये उठता है कि क्या ये सिर्फ किसी पद का लालच है या फिर अपनी बात मनवाने की जिद? राजस्थान की राजनीति में गुटबाजी कोई नई बात नहीं है, लेकिन चुनाव के इस मौसम में जब छात्रों के हकों की लड़ाई लड़नी चाहिए, तब अपनी ही पार्टी के भीतर की खटपट कार्यकर्ताओं का मनोबल गिरा देती है। सोशल मीडिया पर भी छात्र नेता दो हिस्सों में बंट गए हैं—कोई नए अध्यक्ष के सपोर्ट में पोस्ट लिख रहा है, तो कोई 'धोखे' और 'गलत चयन' का नारा बुलंद कर रहा है।
देखा जाए तो ऐसे विवाद छात्र संगठनों के लिए नुकसानदेह साबित होते हैं। जब लीडरशिप ही सवालों के घेरे में हो, तो आम छात्र अपनी समस्याओं को लेकर किसके पास जाएगा? फिलहाल गेंद अब संगठन के आलाकमान के पाले में है। अब देखना होगा कि ये 'नोटिस' सिर्फ खानापूर्ति है या फिर वाकई कुछ बड़े बदलाव की ओर इशारा कर रहा है।
वैसे आपका क्या मानना है? क्या छात्र संगठनों में ऊपर से थोपे गए फैसले सही होते हैं, या फिर जमीनी कार्यकर्ताओं की बात ज्यादा अहमियत रखनी चाहिए?