सिर्फ तबादला नहीं, बल्कि एक्शन मोड में सरकार राजस्थान में ब्यूरोक्रेसी का ये बड़ा फेरबदल क्यों है खास

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News India Live, Digital Desk: राजस्थान की राजनीति और प्रशासन को करीब से देखने वाले जानते हैं कि जिलों का विकास और वहां चल रही योजनाओं की असली मॉनिटरिंग इन्हीं प्रभारी सचिवों के हाथ में होती है। अक्सर शिकायतों का अंबार लगने या काम की रफ़्तार सुस्त पड़ने पर सरकारें इस तरह के बड़े फेरबदल करती हैं। हालिया लिस्ट को देखकर लग रहा है कि मुख्यमंत्री कार्यालय अब सीधी निगरानी के साथ-साथ कड़े नतीजों की भी उम्मीद कर रहा है।

सरकार ने एक साथ 41 प्रभारी सचिवों की नई सूची जारी कर साफ़ कर दिया है कि वे ब्यूरोक्रेसी में ताज़गी और जवाबदेही चाहते हैं। इस फेरबदल में कई बड़े और रसूखदार IAS अफसरों को नए जिले दिए गए हैं, तो कई की ज़िम्मेदारियां बढ़ाई गई हैं। अक्सर सीनियर अधिकारियों को अलग-अलग जिलों का प्रभार देने के पीछे मकसद यही होता है कि राजधानी जयपुर की योजनाएं केवल कागज़ों पर न रह जाएं, बल्कि ज़मीनी स्तर पर भी उनकी प्रगति देखी जा सके।

जिलों में सड़कों की हालत हो, पानी की किल्लत या फिर चिकित्सा सुविधाएँ आम आदमी अक्सर इन बड़ी शिकायतों के समाधान के लिए इन आला अधिकारियों की विज़िट (Visit) का ही इंतज़ार करता है। इस नई लिस्ट के बाद अब अधिकारियों को उन जिलों में जाकर डेरा डालना होगा जिनके वे प्रभारी बने हैं। यह न केवल प्रशासन को गति देगा, बल्कि कलेक्टरों और वहां के स्थानीय अफसरों के काम करने के तरीके को भी एक दिशा मिलेगी।

चर्चा यह भी है कि इस तबादला सूची में सरकार ने उन अधिकारियों पर भरोसा जताया है जिनकी कार्यक्षमता पर उन्हें अटूट विश्वास है। प्रदेश के जिलों का विकास अब इन अधिकारियों के फैसलों और इनकी फुर्ती पर निर्भर करेगा। तो भाई, अब देखना यह होगा कि क्या इन नए 'जिलेदारों' के आने से अटकी हुई योजनाओं में जान आती है या नहीं। आपके जिले की बागडोर अब किसके पास आई है, कमेंट में अपनी बात साझा ज़रूर करें।