Magh Purnima 2026 : फरवरी में इस दिन है माघ पूर्णिमा तिल दान से मिलेगा 32 गुना ज्यादा पुण्य जानें स्नान का शुभ मुहूर्त
News India Live, Digital Desk: हिंदू पंचांग के अनुसार, साल 2026 में फरवरी का महीना आध्यात्मिक दृष्टि से बेहद खास होने वाला है। इस माह में आने वाली माघ पूर्णिमा पर इस बार ग्रहों का ऐसा दुर्लभ संयोग बन रहा है, जिसमें किया गया दान और पवित्र नदियों में स्नान आपको साधारण दिनों के मुकाबले 32 गुना अधिक फल देगा। मान्यता है कि माघ मास में स्वयं देवता स्वर्ग से उतरकर प्रयागराज में संगम तट पर स्नान करने आते हैं।
फरवरी 2026 में कब है पूर्णिमा? (Magh Purnima Date & Time)
ज्योतिष गणना के अनुसार, माघ मास की पूर्णिमा तिथि को लेकर तिथियों का समय इस प्रकार है:
पूर्णिमा तिथि का प्रारंभ: 1 फरवरी 2026 को शाम 07:14 बजे से।
पूर्णिमा तिथि की समाप्ति: 2 फरवरी 2026 को रात 09:20 बजे तक।
उदयातिथि के अनुसार: माघ पूर्णिमा का व्रत और मुख्य स्नान 2 फरवरी 2026 (सोमवार) को किया जाएगा।
तिल दान का 32 गुना लाभ: 'बत्तीसी' का रहस्य
शास्त्रों में माघ पूर्णिमा को 'बत्तीसी पूर्णिमा' के रूप में भी जाना जाता है। इस दिन कुछ विशेष वस्तुओं के दान का विधान है:
| दान की वस्तु | धार्मिक महत्व | फल (Benefit) |
|---|---|---|
| काले तिल | भगवान विष्णु और शनि देव की प्रसन्नता के लिए। | कष्टों से मुक्ति और 32 गुना पुण्य। |
| ऊनी वस्त्र | ठंड के मौसम में जरूरतमंदों को सहायता। | पूर्वजों का आशीर्वाद (पितृ दोष शांति)। |
| गुड़ और अन्न | सूर्य देव की कृपा और आरोग्य की प्राप्ति। | अक्षय पुण्य की प्राप्ति। |
माघ पूर्णिमा पूजा विधि और स्नान मुहूर्त
इस दिन सूर्योदय से पूर्व स्नान करने का विशेष महत्व है। यदि आप गंगा तट पर नहीं जा सकते, तो घर में ही पानी में गंगाजल मिलाकर स्नान करें।
ब्रह्म मुहूर्त स्नान: 2 फरवरी को सुबह 05:23 से 06:14 के बीच स्नान करना सर्वोत्तम है।
सत्यनारायण कथा: इस दिन भगवान विष्णु की 'सत्यनारायण' कथा सुनने से घर में सुख-शांति आती है।
चंद्र दर्शन: शाम को चंद्रमा के उदय होने पर अर्घ्य देने से मानसिक तनाव दूर होता है और आर्थिक उन्नति होती है।
क्यों है इस बार का संयोग खास?
2026 की माघ पूर्णिमा सोमवार के दिन पड़ रही है। सोमवार का दिन चंद्रमा और भगवान शिव को समर्पित है, वहीं पूर्णिमा के स्वामी स्वयं चंद्रदेव हैं। ऐसे में 'सोमवती पूर्णिमा' का यह संयोग उन लोगों के लिए वरदान है जिनकी कुंडली में चंद्र दोष है या जो मानसिक अशांति से जूझ रहे हैं। इस दिन पीपल के वृक्ष की पूजा करने से धन की देवी मां लक्ष्मी का वास घर में सदा बना रहता है।