Cyber Alert 2026: Mac और Chrome यूजर्स पर मंडरा रहा है बड़ा खतरा! भारत सरकार ने जारी की चेतावनी एक क्लिक पर हैक हो सकता है आपका सिस्टम
News India Live, Digital Desk: अगर आप अपने काम के लिए एप्पल का मैकबुक (MacBook) या गूगल क्रोम (Google Chrome) ब्राउज़र इस्तेमाल करते हैं, तो सावधान हो जाइए। CERT-In ने अपनी ताजा एडवाइजरी में खुलासा किया है कि इन प्लेटफॉर्म्स में कुछ गंभीर सुरक्षा खामियां (Vulnerabilities) पाई गई हैं। हैकर्स इन खामियों का फायदा उठाकर न केवल आपका डेटा चोरी कर सकते हैं, बल्कि आपके पूरे सिस्टम का कंट्रोल भी अपने हाथ में ले सकते हैं।
1. macOS यूजर्स के लिए क्या है खतरा? (Apple Alert)
एजेंसी ने एप्पल के प्रोडक्टिविटी ऐप्स, विशेष रूप से Pages और Keynote में बड़ी कमियां पकड़ी हैं।
प्रभावित वर्जन: Pages और Keynote के 15.1 से पुराने सभी वर्जन।
कैसे होता है हमला: हैकर आपको एक खास तरह की 'मैलीशियस' (Malicious) फाइल भेज सकता है। जैसे ही आप उस फाइल को खोलते हैं, वह सिस्टम की मेमोरी में घुसकर आपकी संवेदनशील जानकारी (Sensitive Data) चुरा सकता है।
ट्रैकिंग आईडी: इसे CVE-2025-46316 और CVE-2025-46306 के तहत ट्रैक किया जा रहा है।
2. Google Chrome यूजर्स पर 'हाई-रिस्क' हमला
क्रोम ब्राउज़र में पाई गई खामी और भी खतरनाक है क्योंकि यह 'रिमोट कोड एग्जीक्यूशन' (RCE) की अनुमति देती है।
प्रभावित वर्जन: * Windows और Mac: वर्जन 144.0.7559.109 या .110 से पुराने।
Linux: वर्जन 144.0.7559.109 से पुराने।
खतरे की वजह: क्रोम के 'Background Fetch API' में गलत इंप्लीमेंटेशन के कारण हैकर्स दूर बैठे ही आपके कंप्यूटर पर वायरस या हानिकारक कोड रन कर सकते हैं।
3. तुरंत करें ये 3 काम (Immediate Actions)
सरकार ने यूजर्स को बिना देरी किए निम्नलिखित कदम उठाने की सलाह दी है:
| प्लेटफॉर्म | क्या करें? |
|---|---|
| Google Chrome | ब्राउज़र के Settings > About Chrome में जाएं। यह ऑटोमैटिक अपडेट चेक करेगा। उसे अपडेट कर ब्राउज़र 'Relaunch' करें। |
| Apple macOS | App Store पर जाएं और Pages व Keynote ऐप्स को वर्जन 15.1 पर अपडेट करें। सिस्टम को macOS Sequoia 15.6 या उससे ऊपर अपडेट रखें। |
| General Safety | किसी भी अनजान ईमेल से आए अटैचमेंट या संदिग्ध लिंक पर क्लिक न करें। |
क्यों है यह चिंता का विषय?
CERT-In ने इस खतरे को 'High Severity' की श्रेणी में रखा है। इसका मतलब है कि हमलावर को आपके सिस्टम तक पहुँचने के लिए आपके पास होने की जरूरत नहीं है; वह इंटरनेट के जरिए दुनिया के किसी भी कोने से आपके कंप्यूटर में सेंध लगा सकता है। साइबर एक्सपर्ट्स का कहना है कि डिजिटल युग में 'सॉफ्टवेयर अपडेट' को टालना अपनी तिजोरी की चाबी चोर को देने जैसा है।