Varuna Mudra: चेहरे पर चाहिए पार्लर जैसा निखार? रोजाना 15 मिनट करें वरुण मुद्रा स्किन प्रॉब्लम का ये रामबाण इलाज
News India Live, Digital Desk: योग केवल शरीर को लचीला बनाने के लिए नहीं, बल्कि सुंदरता निखारने के लिए भी जाना जाता है। आयुर्वेद के अनुसार, हमारे हाथ की उंगलियां पंचतत्वों (अग्नि, वायु, आकाश, पृथ्वी और जल) का प्रतिनिधित्व करती हैं। इनमें से 'वरुण मुद्रा' सीधे तौर पर जल तत्व (Water Element) को संतुलित करती है। यदि आपकी त्वचा रूखी है या चेहरे की चमक खो गई है, तो यह मुद्रा आपके लिए किसी वरदान से कम नहीं है।
1. क्या है वरुण मुद्रा? (What is Varuna Mudra?)
'वरुण' का अर्थ है जल के देवता। यह मुद्रा शरीर में पानी की कमी को दूर कर रक्त को शुद्ध करने का काम करती है।
कैसे करें: अपनी सबसे छोटी उंगली (Little Finger) के पोर को अंगूठे (Thumb) के पोर से स्पर्श करें। बाकी तीनों उंगलियां सीधी रखें।
समय: इसे दिन में कभी भी किया जा सकता है, लेकिन सुबह खाली पेट 15 से 30 मिनट तक करना सबसे अधिक प्रभावशाली होता है।
2. ग्लोइंग स्किन के लिए इसके फायदे (Benefits for Skin)
वरुण मुद्रा का नियमित अभ्यास आपकी त्वचा पर जादुई असर डालता है:
| फायदा | प्रभाव (Impact) |
|---|---|
| नेचुरल मॉइस्चराइजर | यह शरीर में जल तत्व को बैलेंस कर ड्राई स्किन (रूखापन) की समस्या को जड़ से खत्म करती है। |
| मुंहासों से राहत | रक्त शुद्ध होने के कारण चेहरे पर होने वाले पिंपल्स और दाग-धब्बे कम होने लगते हैं। |
| एंटी-एजिंग | त्वचा में लचीलापन बढ़ता है, जिससे झुर्रियां (Wrinkles) और ढीली त्वचा में कसावट आती है। |
| सॉफ्ट लिप्स | फटे होंठों और आंखों की जलन को शांत करने में यह मुद्रा अत्यंत सहायक है। |
3. स्किन के अलावा अन्य स्वास्थ्य लाभ
रक्त संचार: यह शरीर में रक्त के प्रवाह को बेहतर बनाती है, जिससे एनीमिया जैसी समस्याओं में सुधार होता है।
मांसपेशियों का दर्द: शरीर में डिहाइड्रेशन के कारण होने वाले दर्द और ऐंठन (Cramps) को दूर करती है।
किडनी और पेट: जल तत्व संतुलित होने से पाचन तंत्र और किडनी की कार्यक्षमता बढ़ती है।
4. अभ्यास करते समय रखें ये सावधानियां
ज्यादा दबाव न दें: अंगूठे और उंगली को बस हल्का सा स्पर्श करें, उन्हें जोर से न दबाएं।
कौन न करें: जिन लोगों को सर्दी-जुकाम, कफ या फेफड़ों में पानी भरने की समस्या हो, उन्हें इस मुद्रा का अभ्यास किसी विशेषज्ञ की सलाह पर ही करना चाहिए।
सही मुद्रा: इस मुद्रा को करते समय सुखासन या पद्मासन में बैठें और अपनी रीढ़ की हड्डी सीधी रखें।
बेहतर परिणाम के लिए टिप
वरुण मुद्रा करते समय गहरी सांस लें और अपना पूरा ध्यान शरीर में बढ़ती ठंडक और ताजगी पर लगाएं। इस मुद्रा के अभ्यास के साथ पर्याप्त मात्रा में पानी पीना न भूलें, क्योंकि यह योगिक क्रिया आपके आंतरिक जल तंत्र को सक्रिय करती है।