Magh Purnima 2026 : माघ पूर्णिमा पर बन रहा है दुर्लभ संयोग, पितृदोष से मुक्ति के लिए करें ये 5 अचूक उपाय, जानें स्नान-दान का शुभ मुहूर्त
News India Live, Digital Desk: सनातन धर्म में माघ मास की पूर्णिमा, जिसे 'माघी पूर्णिमा' भी कहा जाता है, का आध्यात्मिक और धार्मिक महत्व अद्वितीय है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इस पावन तिथि पर स्वयं भगवान विष्णु गंगाजल में निवास करते हैं। यही कारण है कि इस दिन गंगा स्नान और दान को 'अक्षय फल' देने वाला माना गया है। वर्ष 2026 में माघ पूर्णिमा उन लोगों के लिए एक वरदान की तरह है, जिनकी कुंडली में पितृदोष है। पितृदोष को सात पीढ़ियों तक कष्ट देने वाला माना जाता है, जिससे संतान सुख में बाधा और आर्थिक तंगी आती है। आइए जानते हैं इस साल माघी पूर्णिमा की सही तारीख, शुभ मुहूर्त और पितृदोष शांति के अचूक उपाय।
माघ पूर्णिमा 2026: तिथि और शुभ मुहूर्त
हिंदू पंचांग के अनुसार, इस साल पूर्णिमा तिथि का आरंभ और समापन कुछ इस प्रकार है:
पूर्णिमा तिथि शुरू: 1 फरवरी 2026, सुबह 05:52 बजे से।
पूर्णिमा तिथि समाप्त: 2 फरवरी 2026, तड़के 03:28 बजे तक।
स्नान-दान और व्रत: उदया तिथि की गणना के अनुसार, 1 फरवरी 2026 (रविवार) को ही माघ पूर्णिमा का व्रत रखा जाएगा और इसी दिन स्नान-दान के साथ पितृ पूजन के कर्म किए जाएंगे।
पितृदोष से मुक्ति के लिए 5 आसान और अचूक उपाय
अगर आप भी पारिवारिक कलह या आर्थिक तंगी से परेशान हैं, तो माघ पूर्णिमा के दिन ये उपाय आपके जीवन की बाधाएं दूर कर सकते हैं:
1. पवित्र स्नान और तिल तर्पण
सूर्योदय से पूर्व किसी पवित्र नदी, विशेषकर गंगा में स्नान करें। यदि घर पर स्नान कर रहे हैं, तो पानी में थोड़ा गंगाजल मिला लें। स्नान के पश्चात अंजलि में जल और काले तिल लेकर पितरों का ध्यान करते हुए दक्षिण दिशा की ओर तर्पण करें। इससे पितरों की आत्मा को तृप्ति मिलती है।
2. सूर्य देव को विशेष अर्घ्य
सुबह सूर्य देव को जल अर्पित करते समय लोटे में लाल फूल और अक्षत (चावल) जरूर मिलाएं। अर्घ्य देते समय “ॐ पितृभ्यः नमः” मंत्र का जाप करें। यह उपाय पितरों के आशीर्वाद के द्वार खोलता है और वंश वृद्धि में सहायक होता है।
3. दक्षिण दिशा में दीपदान और पाठ
शास्त्रों में दक्षिण दिशा को पितरों की दिशा माना गया है। माघ पूर्णिमा की शाम को घर के दक्षिण कोने में एक चौमुखी दीपक जलाएं। इसके साथ ही 'पितृ स्तोत्र' या 'गजेंद्र मोक्ष' का पाठ करने से पूर्वज अत्यंत प्रसन्न होते हैं और कुंडली के दोषों का प्रभाव कम होता है।
4. पंचबलि कर्म का महत्व
इस दिन अपने पूर्वजों की पसंद का सात्विक भोजन बनाएं। भोजन का पहला हिस्सा अग्नि को समर्पित करें और उसके बाद गाय, कुत्ते, कौवे, चींटी और पक्षियों (पंचबलि) को भोजन कराएं। माना जाता है कि इन माध्यमों से दिया गया भोजन सीधे पितरों तक पहुंचता है।
5. चंद्रमा को दूध का अर्घ्य
चूंकि चंद्रमा मन का कारक है और इसका पितरों से भी गहरा संबंध है, इसलिए रात्रि में चंद्रोदय के समय एक लोटे में जल, कच्चा दूध और सफेद फूल लेकर चंद्रमा को अर्घ्य दें। यह उपाय मानसिक अशांति को दूर कर जीवन में सुख-शांति लाता है।
माघ पूर्णिमा का महत्व
माघी पूर्णिमा के दिन ही प्रयागराज में कल्पवास का समापन भी होता है। इस दिन दान में तिल, गुड़, घी और गर्म कपड़ों का विशेष महत्व है। यदि आप पूरी श्रद्धा के साथ इन नियमों का पालन करते हैं, तो सात पीढ़ियों से चला आ रहा पितृदोष भी समाप्त हो सकता है।