Cooch Behar Bridge Collapse : कूचबिहार में निर्माणाधीन पुल ढहा BJP का ममता सरकार पर हमला यह विकास नहीं, कमीशनखोरी का नतीजा है
News India Live, Digital Desk : पश्चिम बंगाल के कूचबिहार जिले में एक बड़ा हादसा होते-होते टल गया, जब एक निर्माणाधीन पुल का हिस्सा अचानक गिर गया। हालांकि इस घटना में किसी के हताहत होने की खबर नहीं है, लेकिन भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने इसे लेकर तृणमूल कांग्रेस (TMC) सरकार को कटघरे में खड़ा कर दिया है।
1. घटना का विवरण (The Incident)
कूचबिहार के स्थानीय इलाके में बन रहे इस पुल का एक हिस्सा ढलाई के कुछ समय बाद ही ढह गया।
लापरवाही का आरोप: स्थानीय निवासियों का आरोप है कि निर्माण में इस्तेमाल की जा रही सामग्री बेहद घटिया दर्जे की थी।
समय: यह घटना 30 जनवरी 2026 की शाम को हुई, जब निर्माण कार्य प्रगति पर था।
2. BJP का तीखा हमला: "कट मनी" की राजनीति?
हादसे के तुरंत बाद भाजपा के प्रदेश नेतृत्व और स्थानीय विधायकों ने सरकार को घेरा:
कमीशनखोरी का आरोप: भाजपा ने कहा कि TMC के नेता "कट मनी" (कमीशन) के चक्कर में निर्माण की गुणवत्ता से समझौता कर रहे हैं। भाजपा प्रवक्ता ने तंज कसते हुए कहा, "दीदी के राज में पुल नहीं, भ्रष्टाचार के स्तंभ बन रहे हैं।"
जांच की मांग: शुभेंदु अधिकारी और अन्य वरिष्ठ नेताओं ने इस मामले की उच्च स्तरीय निष्पक्ष जांच और ठेकेदार का लाइसेंस रद्द करने की मांग की है।
3. TMC का बचाव और पलटवार
तृणमूल कांग्रेस ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इसे केवल एक "तकनीकी विफलता" बताया है:
प्रशासनिक रुख: TMC जिला नेतृत्व का कहना है कि सरकार ने तुरंत जांच के आदेश दे दिए हैं। यदि निर्माण कंपनी दोषी पाई जाती है, तो उस पर सख्त कार्रवाई होगी।
राजनीति का आरोप: TMC ने पलटवार करते हुए कहा कि भाजपा हर दुर्घटना पर राजनीति करती है, जबकि उन्हें केंद्र सरकार के अधूरे प्रोजेक्ट्स पर ध्यान देना चाहिए।
4. बंगाल में 'ब्रिज कोलैप्स' का इतिहास
यह पहली बार नहीं है जब बंगाल में पुलों की मजबूती पर सवाल उठे हैं:
वर्ष | स्थान | प्रभाव |
2016 | विवेकानंद फ्लाईओवर (कोलकाता) | भीषण हादसा, कई मौतें |
2018 | माझेरहाट पुल (कोलकाता) | यातायात बाधित, जान-माल का नुकसान |
2026 | कूचबिहार पुल | निर्माणाधीन ढांचा ढहा, राजनीतिक उबाल |
बुनियादी ढांचे पर संकट
कूचबिहार की यह घटना एक बार फिर सार्वजनिक बुनियादी ढांचे की सुरक्षा और ऑडिट की आवश्यकता को उजागर करती है। चुनावी वर्ष (2026 निकाय चुनाव) के करीब होने के कारण, यह मुद्दा आने वाले दिनों में और भी गरमा सकता है। विपक्ष इसे "ममता सरकार की विफलता" के बड़े नैरेटिव के रूप में पेश करने की कोशिश कर रहा है।