दांतों की सड़न को न लें हल्के में, जानें ओरल हेल्थ से जुड़ी 5 गंभीर बीमारियां
News India Live, Digital Desk: शोध बताते हैं कि हमारे मुंह में लाखों बैक्टीरिया होते हैं। जब हम दांतों की सफाई सही से नहीं करते, तो ये बैक्टीरिया खून के प्रवाह (Bloodstream) में शामिल होकर शरीर के अन्य हिस्सों तक पहुंच जाते हैं। डॉ. समीर (डेंटल सर्जन) के अनुसार, "खराब ओरल हेल्थ शरीर में क्रॉनिक इन्फ्लेमेशन (सूजन) पैदा करती है, जो कई बीमारियों की जड़ है।"
1. दांतों की सड़न से होने वाले बड़े खतरे (Major Health Risks)
| प्रभावित अंग | बीमारी का खतरा | कारण |
|---|---|---|
| दिल (Heart) | एंडोकार्डिटिस/हार्ट अटैक | मुंह के बैक्टीरिया खून के जरिए दिल के वाल्व तक पहुंचकर संक्रमण फैला सकते हैं। |
| दिमाग (Brain) | डिमेंशिया/अल्जाइमर | मसूड़ों की बीमारी पैदा करने वाले बैक्टीरिया मस्तिष्क की कोशिकाओं को नुकसान पहुंचा सकते हैं। |
| फेफड़े (Lungs) | निमोनिया | मुंह के बैक्टीरिया सांस के जरिए फेफड़ों में जाकर गंभीर संक्रमण पैदा कर सकते हैं। |
| किडनी (Kidney) | क्रॉनिक किडनी डिजीज | मसूड़ों का संक्रमण शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को कमजोर कर किडनी पर दबाव डालता है। |
2. डायबिटीज और ओरल हेल्थ का कनेक्शन
डायबिटीज के मरीजों के लिए दांतों की सड़न और भी खतरनाक है।
टू-वे ट्रैफिक: मसूड़ों की गंभीर बीमारी (Periodontitis) शरीर में ब्लड शुगर लेवल को बढ़ा सकती है। वहीं, हाई शुगर वाले मरीजों के मसूड़ों में संक्रमण होने का खतरा आम लोगों से कहीं अधिक होता है।
3. 'साइलेंट किलर' के लक्षण जिन्हें आप नजरअंदाज न करें
ठंडी या गर्म चीजों से दांतों में तेज झनझनाहट।
मसूड़ों से खून आना या लगातार सूजन रहना।
मुंह से लगातार बदबू (Bad Breath) आना, जो ब्रश करने के बाद भी न जाए।
दांतों पर सफेद, काले या भूरे रंग के धब्बे दिखना।
4. बचाव के अचूक उपाय (Prevention Tips)
ब्रश करने का सही तरीका: दिन में दो बार (सुबह और रात को सोने से पहले) फ्लोराइड युक्त टूथपेस्ट से ब्रश करें।
जीभ की सफाई: बैक्टीरिया केवल दांतों पर नहीं, जीभ पर भी पनपते हैं। टंग क्लीनर का उपयोग अनिवार्य है।
शुगर पर कंट्रोल: अधिक मीठा और चिपचिपा भोजन दांतों की इनेमल को नष्ट कर देता है।
नियमित चेकअप: साल में कम से कम दो बार डेंटिस्ट के पास जाएं, भले ही आपको दर्द न हो।
क्या आप 'फ्लॉस' (Floss) करते हैं?
भारत में केवल 10% लोग ही नियमित रूप से फ्लॉसिंग करते हैं। ब्रश उन जगहों तक नहीं पहुंच पाता जहां दो दांत आपस में मिलते हैं। वहीं सबसे ज्यादा सड़न शुरू होती है। अगर आप फ्लॉस नहीं कर रहे हैं, तो आप अपने दांतों की 35% सतह को साफ नहीं कर रहे हैं।