जम्मू-कश्मीर में फिदायीन हमले की साजिश ISI और ISIS का खौफनाक गठजोड़ ,घाटी में 12 आत्मघाती हमलावरों के सक्रिय होने की खबर
News India Live, Digital Desk: भारतीय खुफिया एजेंसियों (IB और RAW) को मिले पुख्ता इनपुट्स के अनुसार, पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी ISI और आतंकी संगठन ISIS मिलकर जम्मू-कश्मीर में किसी बड़े आतंकवादी हमले को अंजाम देने की फिराक में हैं। रिपोर्टों के अनुसार, लगभग 12 सुसाइड बॉम्बर्स (फिदायीन) नियंत्रण रेखा (LoC) पार कर घाटी में प्रवेश कर चुके हैं और अलग-अलग इलाकों में छिपे हुए हैं।
1. खुफिया इनपुट की 3 बड़ी बातें (Key Intelligence Inputs)
सुरक्षा एजेंसियों द्वारा जारी किए गए डोजियर में इन खतरों का जिक्र किया गया है:
नया मॉड्यूल: इस बार ISI ने स्थानीय युवाओं को बरगलाने के लिए ISIS की विचारधारा का सहारा लिया है ताकि हमलों को अधिक "कट्टरपंथी" रंग दिया जा सके।
सॉफ्ट टारगेट: आतंकियों के निशाने पर सुरक्षा बलों के काफिले, कश्मीरी पंडितों की बस्तियां और बाहरी राज्यों से आए मजदूर हो सकते हैं।
हथियारों की नई खेप: सूत्रों के अनुसार, इन हमलावरों को ड्रोन के जरिए गिराए गए अत्याधुनिक हथियारों (M4 कार्बाइन और स्टिकी बॉम्ब) से लैस किया गया है।
2. संवेदनशील इलाके और 'हाई अलर्ट' (Sensitive Zones)
सुरक्षा बलों ने घाटी के इन 5 जिलों में 'सर्च ऑपरेशन' तेज कर दिया है:
पुलवामा और शोपियां: यहाँ पुराने आतंकी ठिकानों की निगरानी बढ़ाई गई है।
राजौरी और पुंछ: पीर पंजाल के जंगलों में 'ऑपरेशन सर्पविनाश 2.0' जैसे बड़े अभियान की तैयारी है।
श्रीनगर: शहर के प्रवेश द्वारों पर अतिरिक्त नाकेबंदी की गई है।
3. सुरक्षा बलों की जवाबी तैयारी
| एजेंसी | कार्रवाई |
|---|---|
| भारतीय सेना | LoC पर एंटी-इंफिल्ट्रेशन ग्रिड (AIOS) को और मजबूत किया गया है। |
| CRPF/JKP | शहरी इलाकों में 'कैस' (Cordon and Search Operations) अभियान शुरू। |
| NIA | टेरर फंडिंग और स्लीपर सेल्स के ठिकानों पर छापेमारी जारी। |
4. आम नागरिकों के लिए एडवाइजरी
प्रशासन ने स्थानीय लोगों और पर्यटकों से अपील की है कि:
किसी भी संदिग्ध बैग या लावारिस वस्तु को न छुएं।
किसी अनजान व्यक्ति को घर में पनाह न दें और उसकी जानकारी तुरंत नजदीकी पुलिस स्टेशन को दें।
सोशल मीडिया पर फैलने वाली अफवाहों से बचें।
क्यों बौखलाया है ISI?
विशेषज्ञों का मानना है कि जम्मू-कश्मीर में हो रहे सफल निवेश, जी-20 सम्मेलनों के बाद बढ़ते पर्यटन और शांतिपूर्ण माहौल से पाकिस्तान हताश है। आने वाले विधानसभा चुनावों (2026) से पहले अशांति फैलाना ही इन आतंकी संगठनों का मुख्य उद्देश्य है।