Lucknow NIA Court: अवैध धर्मांतरण मामले में आरोप तय, शरिया कानून लागू करने की बड़ी साजिश का खुलासा
News India Live, Digital Desk: उत्तर प्रदेश की राजधानी में स्थित विशेष NIA कोर्ट ने अवैध धर्मांतरण और देश के खिलाफ युद्ध छेड़ने की साजिश के एक गंभीर मामले में बड़ा कदम उठाया है। अदालत ने मुख्य आरोपी जलालुद्दीन (जिसे 'छंगुर बाबा' के नाम से भी जाना जाता है) और उसके सहयोगियों के खिलाफ आईपीसी और यूपी अवैध धर्मांतरण रोकथाम कानून की विभिन्न धाराओं के तहत आरोप तय (Charges Frame) कर दिए हैं।
क्या है पूरा मामला?
यह मामला एक बड़े 'धर्मांतरण सिंडिकेट' से जुड़ा है, जिसका खुलासा यूपी एटीएस (ATS) और एनआईए (NIA) की संयुक्त जांच में हुआ था।
आरोप: जलालुद्दीन और उसके गिरोह पर आरोप है कि वे आर्थिक रूप से कमजोर हिंदुओं, विधवा महिलाओं और लाचार मजदूरों को लालच, शादी का झांसा और डरा-धमकाकर इस्लाम में परिवर्तित कर रहे थे।
शरिया कानून की साजिश: जांच एजेंसियों ने अदालत को बताया कि इस सिंडिकेट का अंतिम उद्देश्य केवल धर्मांतरण नहीं, बल्कि भारत के संविधान को चुनौती देते हुए देश के कुछ हिस्सों में 'शरिया कानून' स्थापित करना और देश की अखंडता को नुकसान पहुंचाना था।
विदेशी फंडिंग: जलालुद्दीन के 22 बैंक खातों में करीब ₹60 करोड़ के संदिग्ध लेनदेन पाए गए हैं, जिनमें से एक बड़ा हिस्सा खाड़ी देशों और अन्य विदेशी संस्थाओं से आया था।
अदालत में तय किए गए मुख्य आरोप
विशेष न्यायाधीश ने आरोपियों के खिलाफ निम्नलिखित धाराओं में मुकदमा चलाने का आदेश दिया है:
धारा 121-A: भारत सरकार के खिलाफ युद्ध छेड़ने की साजिश।
धारा 123: युद्ध की साजिश को सुविधाजनक बनाने के इरादे से जानकारी छिपाना।
धारा 153-A: धर्म के आधार पर विभिन्न समूहों के बीच शत्रुता को बढ़ावा देना।
UP धर्मांतरण कानून 2021: अवैध और सामूहिक धर्मांतरण के उल्लंघन की धाराएं।
'छंगुर बाबा' की संलिप्तता
जलालुद्दीन उर्फ छंगुर बाबा को इस सिंडिकेट का मास्टरमाइंड माना जा रहा है।
मोडस ऑपेरंडी: वह उत्तर प्रदेश के सुदूर गांवों और महाराष्ट्र के कुछ हिस्सों में सक्रिय था। वह 'चंगाई सभा' या 'हीलिंग सेंटर' की आड़ में लोगों को इकट्ठा करता था और फिर उन्हें मजहब बदलने के लिए प्रेरित करता था।
ईडी (ED) की कार्रवाई: इस मामले में मनी लॉन्ड्रिंग के कोण की जांच कर रहे प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने पहले ही उसकी करोड़ों की संपत्ति की जानकारी जुटाई है और वह फिलहाल न्यायिक हिरासत में है।
हालिया न्यायिक संदर्भ
दिलचस्प बात यह है कि जहां लखनऊ की एनआईए कोर्ट ने इस मामले में आरोप तय किए हैं, वहीं इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाल ही में (16-17 अप्रैल 2026) कुछ अन्य धर्मांतरण मामलों में 'फर्जी एफआईआर' दर्ज होने पर नाराजगी जताई थी। हालांकि, जलालुद्दीन के मामले में अदालत ने सबूतों और विदेशी फंडिंग के ट्रैक रिकॉर्ड को देखते हुए प्रथम दृष्टया अपराध को गंभीर माना है।