Ladakh Protest : सोनम वांगचुक की हिरासत पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, केंद्र सरकार को दिया बड़ा निर्देश
News India Live, Digital Desk: लद्दाख को विशेष राज्य का दर्जा दिलाने और छठी अनुसूची (Sixth Schedule) की मांग को लेकर 'दिल्ली चलो' पदयात्रा पर निकले मशहूर पर्यावरणविद सोनम वांगचुक (Sonam Wangchuk) की हिरासत के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा हस्तक्षेप किया है। शीर्ष अदालत ने केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस को वांगचुक और उनके समर्थकों की हिरासत पर पुनर्विचार करने का निर्देश दिया है।
सुप्रीम कोर्ट की इस टिप्पणी के बाद अब यह संभावना जताई जा रही है कि लद्दाख के प्रदर्शनकारियों को जल्द ही राहत मिल सकती है।
सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा? 'शांतिपूर्ण प्रदर्शन' पर जोर
न्यायमूर्ति की पीठ ने याचिका पर सुनवाई करते हुए केंद्र सरकार से सवाल किया कि आखिर किस आधार पर शांतिपूर्ण तरीके से पदयात्रा कर रहे लोगों को हिरासत में लिया गया है। कोर्ट ने कहा कि लोकतांत्रिक देश में अपनी मांगों को लेकर आवाज उठाना नागरिकों का अधिकार है। अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि प्रदर्शनकारी शांति बनाए रखने का आश्वासन देते हैं, तो उन्हें उनकी बात रखने का मौका मिलना चाहिए।
सिंघू बॉर्डर पर क्यों रोके गए सोनम वांगचुक?
बता दें कि सोनम वांगचुक और लद्दाख के लगभग 150 समर्थकों को दिल्ली पुलिस ने सिंघू बॉर्डर पर रोककर हिरासत में ले लिया था। दिल्ली पुलिस ने राजधानी में लागू धारा 163 (पुरानी धारा 144) का हवाला देते हुए सुरक्षा कारणों से यह कार्रवाई की थी। वांगचुक लेह से पैदल चलकर दिल्ली के राजघाट पहुंचना चाहते थे, ताकि गांधी जयंती के अवसर पर अपनी मांगों को सरकार के सामने रख सकें।
लद्दाख की प्रमुख मांगें: आखिर क्यों हो रहा है विरोध?
सोनम वांगचुक और लद्दाख के लोग मुख्य रूप से चार मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं:
लद्दाख को संविधान की छठी अनुसूची में शामिल करना।
लद्दाख के लिए पूर्ण राज्य का दर्जा।
स्थानीय युवाओं के लिए नौकरियों में आरक्षण।
लेह और कारगिल के लिए अलग संसदीय सीटें।
राजनीतिक सरगर्मी तेज, विपक्ष ने घेरा
सोनम वांगचुक की हिरासत को लेकर राहुल गांधी समेत कई विपक्षी नेताओं ने सरकार की आलोचना की है। राहुल गांधी ने इसे 'तानाशाही' करार देते हुए कहा कि लद्दाख की आवाज को दबाया नहीं जा सकता। वहीं, दिल्ली के मुख्यमंत्री कार्यालय ने भी इस हिरासत को गलत बताया है।
आगे क्या?
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद अब सबकी नजरें केंद्र सरकार के अगले कदम पर हैं। क्या सरकार वांगचुक को राजघाट जाने की अनुमति देगी या उन्हें वापस लद्दाख भेज दिया जाएगा? फिलहाल, दिल्ली की सीमाओं पर सुरक्षा व्यवस्था अभी भी कड़ी बनी हुई है।