खाटू श्याम निशान यात्रा के ये 5 नियम जान लें, वरना अधूरी रह जाएगी पूजा जानें कहां से शुरू होती है यात्रा

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News India Live, Digital Desk : राजस्थान के सीकर जिले में स्थित खाटू श्याम जी का फाल्गुन लक्खी मेला (Falgun Lakhi Mela 2026) शुरू होने वाला है। इस मेले का सबसे मुख्य आकर्षण 'निशान यात्रा' होती है। भक्त हाथों में श्याम बाबा का ध्वज (निशान) लेकर मीलों पैदल चलते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि निशान उठाने के कुछ बेहद कड़े नियम हैं? अगर आप भी इस बार निशान यात्रा में शामिल हो रहे हैं, तो यह जानकारी आपके लिए बेहद जरूरी है।

निशान यात्रा कहां से शुरू होती है? (Starting Point)

खाटू श्याम जी की आधिकारिक और सबसे पवित्र निशान यात्रा रींगस (Reengus) से शुरू होती है।

दूरी: रींगस से खाटू धाम की दूरी लगभग 17 से 18 किलोमीटर है।

पैदल यात्रा: भक्त इस दूरी को बाबा के जयकारों के साथ पैदल तय करते हैं। कई श्रद्धालु कनक दंडवत करते हुए भी मंदिर पहुँचते हैं।

निशान यात्रा के 5 महत्वपूर्ण नियम (Essential Rules)

मान्यता है कि निशान यात्रा के दौरान इन नियमों का पालन करने पर ही बाबा श्याम प्रसन्न होते हैं:

जमीन पर न रखें निशान: यात्रा शुरू करने के बाद निशान (ध्वज) को कभी भी जमीन पर नहीं रखा जाता। यदि आपको विश्राम करना है, तो इसे किसी स्टैंड या ऊंचे स्थान पर रखें या किसी अन्य भक्त को थमा दें।

सूचक का सम्मान: निशान को बाबा श्याम का विजय प्रतीक माना जाता है। इसे हमेशा गर्व से ऊंचा उठाकर रखना चाहिए।

नारियल और श्रृंगार: निशान के साथ एक नारियल और मोरपंख बांधना शुभ माना जाता है। इसे बाबा के चरणों में अर्पित करने के बाद ही यात्रा सफल मानी जाती है।

शुद्धता का ध्यान: यात्रा के दौरान खान-पान और शारीरिक शुद्धि का विशेष ध्यान रखा जाता है। कई भक्त नंगे पैर ही यह कठिन यात्रा पूरी करते हैं।

निशान का विसर्जन/अर्पण: मंदिर पहुँचने के बाद निशान को मंदिर के शिखर पर या निर्धारित स्थान पर चढ़ाया जाता है। इसे घर वापस नहीं लाया जाता।

कब है फाल्गुन लक्खी मेला 2026? (Important Dates)

फाल्गुन माह की शुक्ल पक्ष की द्वितीया से द्वादशी तक यह मेला भरता है। मुख्य मेला आमला एकादशी के दिन होता है।

मुख्य तिथि: इस वर्ष फाल्गुन एकादशी और द्वादशी पर भक्तों का सैलाब उमड़ने की उम्मीद है। प्रशासन ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए हैं।