Karnataka Politics : क्या बदलेगा कर्नाटक का मुख्यमंत्री? डी.के. शिवकुमार और खड़गे की दिल्ली रवानगी से मची हलचल, जानें क्या है 2.5 साल वाला पावर फॉर्मूला
News India Live, Digital Desk: कर्नाटक की कांग्रेस सरकार में एक बार फिर 'कुर्सी' को लेकर सस्पेंस गहरा गया है। उपमुख्यमंत्री और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष डी.के. शिवकुमार (DK Shivakumar) रविवार शाम कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के साथ दिल्ली के लिए रवाना हुए। मुख्यमंत्री सिद्धारमैया द्वारा रिकॉर्ड 17वां बजट पेश किए जाने के ठीक बाद हुए इस दौरे ने उन अटकलों को हवा दे दी है कि क्या बजट सत्र के बाद राज्य में मुख्यमंत्री बदला जाएगा।
क्यों हो रही है मुख्यमंत्री बदलने की चर्चा?
कर्नाटक में नेतृत्व परिवर्तन की चर्चाओं के पीछे तीन मुख्य कारण माने जा रहे हैं:
ढाई साल का समझौता (2.5 Year Formula): शिवकुमार समर्थकों का दावा है कि 2023 में सरकार गठन के समय हाईकमान ने दोनों नेताओं के बीच कार्यकाल बांटने (Power Sharing) का वादा किया था। सिद्धारमैया ने पिछले साल नवंबर में अपना आधा कार्यकाल पूरा कर लिया है।
विधायकों की 'डिनर डिप्लोमेसी': हाल ही में शिवकुमार के वफादार कुछ विधायकों ने बेंगलुरु में एक डिनर मीटिंग की थी, जिसमें बजट सत्र (27 मार्च) खत्म होने के बाद शिवकुमार को सीएम बनाने की मांग को लेकर दिल्ली जाने की रणनीति बनाई गई थी।
शिवकुमार का 'पॉवर शो': डी.के. शिवकुमार 10 मार्च को प्रदेश अध्यक्ष के रूप में अपने 6 साल पूरे होने पर सभी विधायकों को डिनर दे रहे हैं, जिसे उनकी ताकत के प्रदर्शन के रूप में देखा जा रहा है।
सिद्धारमैया का रुख: 'हाईकमान जो कहेगा, वही होगा'
लगातार बढ़ती चर्चाओं के बीच मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने भी चुप्पी तोड़ी है। उन्होंने मैसूर में मीडिया से बात करते हुए कहा, "मैं तब तक पद पर हूँ जब तक पार्टी आलाकमान चाहता है। अगर वे मुझे पद छोड़ने को कहेंगे, तो मैं तुरंत हट जाऊँगा। अगर वे जारी रखने को कहेंगे, तो मैं अगला बजट भी पेश करूँगा।"
क्या कहते हैं डी.के. शिवकुमार?
दिल्ली जाने से पहले शिवकुमार ने इन चर्चाओं को ज्यादा तवज्जो नहीं दी। उन्होंने कहा कि वह एक निजी कार्यक्रम और पार्टी के कुछ संगठनात्मक कार्यों के सिलसिले में दिल्ली जा रहे हैं। हालांकि, उन्होंने यह भी जोड़ा कि राजनीति में "समय ही सब कुछ तय करता है।"
संसद सत्र और बजट सत्र का असर
वर्तमान में कर्नाटक विधानसभा का बजट सत्र चल रहा है जो 27 मार्च 2026 को समाप्त होगा। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि बजट सत्र के दौरान कांग्रेस नेतृत्व किसी भी तरह के बदलाव से बचेगा ताकि विपक्ष को घेराबंदी का मौका न मिले। असली हलचल अप्रैल की शुरुआत में देखने को मिल सकती है।