Kalashtami Vrat 2026: आज कालाष्टमी पर बन रहा है वृद्धि योग, शत्रुओं के नाश के लिए ऐसे करें काल भैरव की पूजा; जानें शुभ मुहूर्त
आध्यात्मिक डेस्क। आज सोमवार, 9 फरवरी 2026 को फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि है। सनातन धर्म में इस दिन को कालाष्टमी के रूप में मनाया जाता है। यह पावन तिथि तंत्र-मंत्र और बाधाओं के निवारण के देवता भगवान काल भैरव को समर्पित है। ज्योतिषीय गणना के अनुसार, इस साल की कालाष्टमी बेहद खास है क्योंकि आज वृद्धि योग का निर्माण हो रहा है, जो 10 फरवरी की रात तक रहेगा। मान्यता है कि इस दिन व्रत रखने और भैरव बाबा की उपासना करने से साधक को अज्ञात भय से मुक्ति मिलती है और गुप्त शत्रुओं का नाश होता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, महादेव के इस स्वरूप की पूजा करने से न केवल नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है, बल्कि असाध्य रोगों से भी छुटकारा मिलता है।
कालाष्टमी 2026: पूजा के लिए सबसे सटीक शुभ मुहूर्त
आज के दिन काल भैरव की आराधना के लिए कई महत्वपूर्ण मुहूर्त उपलब्ध हैं। अपनी सुविधा के अनुसार आप इन समयों का चयन कर सकते हैं:
ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 05:21 से 06:12 बजे तक (साधना के संकल्प के लिए सर्वश्रेष्ठ)।
अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 12:13 से 12:57 बजे तक।
विजय मुहूर्त: दोपहर 02:27 से 03:10 बजे तक।
गोधूलि मुहूर्त: शाम 06:04 से 06:30 बजे तक।
अमृत काल: रात 10:04 से 11:52 बजे तक (निशिता काल पूजा के लिए विशेष)।
कालाष्टमी का धार्मिक महत्व और लाभ
कालाष्टमी का व्रत विशेष रूप से उन लोगों के लिए अमोघ माना जाता है जो जीवन में बार-बार आने वाली बाधाओं या कोर्ट-कचहरी के मामलों से परेशान हैं।
शत्रु विजय: काल भैरव को 'क्षेत्रपाल' कहा जाता है, इनकी कृपा से विरोधियों की चालें विफल हो जाती हैं।
मनोकामना पूर्ति: वृद्धि योग में की गई पूजा का फल कई गुना बढ़कर मिलता है, जिससे रुके हुए सरकारी कार्य पूरे होते हैं।
मानसिक शांति: शनि और राहु के दोषों से मुक्ति पाने के लिए भी आज के दिन भैरव चालीसा या स्तुति का पाठ करना लाभकारी होता है।
भैरव स्तुति: मंत्रों से करें बाबा को प्रसन्न
भैरव बाबा की कृपा पाने के लिए आज 'भैरव अष्टकम' या विशिष्ट स्तुति का पाठ जरूर करें। इसके कुछ प्रमुख अंश इस प्रकार हैं:
"यं यं यं यक्षरूपं दशदिशिविदितं भूमिकम्पायमानं। सं सं संहारमूर्तिं शिरमुकुटजटाशेखरं चन्द्रबिम्बम्।।"
"पं पं पं पापनाशं प्रणमत सततं भैरवं क्षेत्रपालम्।।"
आज की पूजन विधि: इन बातों का रखें ध्यान
शुद्धि: सुबह स्नान के बाद काले या गहरे नीले वस्त्र धारण करना शुभ माना जाता है।
दीप दान: काल भैरव के सामने सरसों के तेल का चौमुखी दीपक जलाएं।
भोग: बाबा को इमरती, जलेबी या उड़द की दाल के बड़े अर्पित करें।
विशेष सेवा: आज के दिन काले कुत्ते को गुड़ या मीठी रोटी खिलाना साक्षात काल भैरव की सेवा माना जाता है।