Kalashtami 2026 : क्यों कहलाते हैं बाबा काल भैरव काशी के कोतवाल? जानें व्रत कथा और पूजा का शुभ मुहूर्त
News India Live, Digital Desk: आज यानी 9 फरवरी 2026 को फाल्गुन मास की कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि है, जिसे कालाष्टमी के रूप में मनाया जा रहा है। भगवान शिव के रौद्र रूप 'काल भैरव' को समर्पित यह दिन तंत्र-मंत्र की साधना और कष्टों के निवारण के लिए अत्यंत फलदायी माना जाता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि महादेव के इस स्वरूप को 'काशी का कोतवाल' क्यों कहा जाता है?
क्यों कहलाते हैं 'काशी के कोतवाल'?
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, जब भगवान शिव ने काल भैरव की उत्पत्ति की, तो उन्हें काशी (वाराणसी) का रक्षक नियुक्त किया। ऐसा माना जाता है कि बाबा विश्वनाथ की नगरी काशी में रहने वाले हर व्यक्ति और यहाँ तक कि यमराज को भी बाबा काल भैरव की अनुमति लेनी पड़ती है।
बिना इनके दर्शन, विश्वनाथ पूजा अधूरी: कहा जाता है कि यदि आपने काशी विश्वनाथ के दर्शन किए लेकिन काल भैरव के दरबार में हाजिरी नहीं लगाई, तो आपकी यात्रा सफल नहीं मानी जाती। वे काशी के दंडनायक हैं, जो बुरे कर्मों वालों को दंड और भक्तों को सुरक्षा प्रदान करते हैं।
कालाष्टमी व्रत कथा: जब ब्रह्मा जी का अहंकार टूटा
शिव पुराण के अनुसार, एक बार ब्रह्मा, विष्णु और महेश के बीच श्रेष्ठता को लेकर विवाद हुआ। इस दौरान ब्रह्मा जी के पांचवें मुख ने महादेव के प्रति अपमानजनक शब्द कहे। क्रोधित होकर शिव जी ने 'भैरव' रूप धारण किया और ब्रह्मा जी के उस मुख को काट दिया।
ब्रह्म हत्या के पाप से मुक्ति:
मुख काटने के कारण भैरव जी पर ब्रह्म हत्या का पाप लगा। महादेव के आदेश पर वे विभिन्न तीर्थों पर गए, लेकिन जब वे काशी पहुँचे, तो ब्रह्म हत्या का वह कपाल उनके हाथ से छूट गया और वे पाप मुक्त हो गए। तभी से वे काशी में ही स्थापित हो गए।
कालाष्टमी पूजा विधि और महत्व
शुभ मुहूर्त: अष्टमी तिथि का प्रारंभ और समापन समय पंचांग के अनुसार आज रात तक प्रभावी है।
सवारी: भगवान काल भैरव की सवारी 'काला कुत्ता' है। आज के दिन काले कुत्ते को मीठी रोटी या गुड़ खिलाना अत्यंत शुभ माना जाता है।
भोग: इन्हें इमरती, मदिरा (तामसिक पूजा में) या नारियल-मिठाई का भोग लगाया जाता है।
विशेष फल: कालाष्टमी के दिन "ॐ कालभैरवाय नमः" मंत्र का जाप करने से अकाल मृत्यु का भय समाप्त होता है और शत्रुओं पर विजय प्राप्त होती है