गोलगप्पे के ठेले पर औचक निरीक्षण करने पहुंच गईं अफसर मैडम
शहर की व्यस्त सड़कों और चंचल बाजारों में जब भी शाम ढलती है, तो चाट-पूरी और खासकर पानीपूरी यानी गोलगप्पे के ठेलों पर लगने वाली भीड़ किसी मेले से कम नहीं होती, जहां बच्चे से लेकर बड़े तक चटकारे लेते नजर आते हैं। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि जिस ठेले पर आप बड़े चाव से तीखे और खट्टे पानी वाले गोलगप्पे खा रहे हैं, वहां साफ-सफाई के नाम पर किस हद तक लापरवाही बरती जा रही है? कुछ ऐसा ही नजारा तब देखने को मिला जब एक तेज-तर्रार महिला प्रशासनिक अधिकारी यानी 'मैडम अफसर' ने शहर के एक लोकप्रिय गोलगप्पे के ठेले पर औचक निरीक्षण (Surprise Inspection) कर दिया। जब उस अफसर मैडम ने ठेले के पास जाकर बारीकी से जांच की, तो वहां न तो हाथ धोने के लिए साफ पानी या हैंडवॉश का कोई इंतजाम मिला और न ही विक्रेता ने दस्ताने (Gloves) पहने हुए थे, जिसे देखकर वे हैरान रह गईं। स्वच्छता और स्वास्थ्य के नियमों की इस खुली धज्जियां उड़ते देख अधिकारी महोदयी ने मौके पर ही कड़े निर्देश जारी किए, जिसके बाद से शहर के तमाम स्ट्रीट फूड विक्रेताओं के बीच हड़कंप मच गया है।
स्ट्रीट फूड और हाइजीन को लेकर लगातार बढ़ रही चिंताएं: आम जनता के स्वास्थ्य के साथ कैसे हो रहा है खिलवाड़
आज के समय में स्ट्रीट फूड संस्कृति हमारी खानपान शैली का एक अहम हिस्सा बन चुकी है और हर कोई शाम के वक्त चाट-पूरी का लुत्फ उठाना पसंद करता है, लेकिन इसके पीछे छिपा स्वास्थ्य का जोखिम किसी से छिपा नहीं है। हाल ही में सामने आई इस घटना ने एक बार फिर इस गंभीर सवाल को खड़ा कर दिया है कि क्या हम स्वाद के चक्कर में अपनी सेहत के साथ बहुत बड़ा खिलवाड़ कर रहे हैं। जब अफसर मैडम ने उस गोलगप्पे वाले के ठेले की जांच की, तो उन्होंने पाया कि खुले में रखे पानी, मक्खियों भिनभिनाती चटनी और बिना धुले हाथों से परोसी जा रही चीजें सीधे तौर पर टायफाइड, पीलिया और फूड पॉइजन जैसी गंभीर बीमारियों को न्यौता दे रही हैं। ग्राहकों की भीड़ से घिरे रहने वाले इन ठेलों पर जब खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) के नियमों की इस तरह धज्जियां उड़ाई जाती हैं, तो प्रशासन का सख्त होना लाजिमी हो जाता है, क्योंकि आम जनता की जान और सेहत से बढ़कर कुछ नहीं हो सकता।
औचक निरीक्षण के दौरान क्या-क्या मिली खामियां और मौके पर मौजूद लोगों की कैसी रही तीखी प्रतिक्रिया
जैसे ही उस महिला प्रशासनिक अधिकारी का काफिला या टीम अचानक उस गोलगप्पे के ठेले पर रुकी, आसपास मौजूद खरीदारों में एक पल के लिए सन्नाटा पसर गया कि आखिर क्या हो गया है। जब अधिकारी ने ठेले पर रखे बर्तनों, पानी की गुणवत्ता और साफ-सफाई के स्तर को चेक किया, तो वहां एक के बाद एक कई चौंकाने वाली खामियां सामने आईं, जिनमें बिना ढके मसाले, गंदे कपड़े से हाथ पोंछना और पीने के पानी का अशुद्ध होना शामिल था। मौके पर मौजूद कई ग्राहकों ने भी यह स्वीकार किया कि वे स्वाद के आगे इन बातों पर ध्यान नहीं देते थे, लेकिन इस तरह की औचक कार्रवाई देखकर उन्हें भी अपनी सेहत को लेकर अहसास हुआ कि कितनी बड़ी लापरवाही हो रही थी। अधिकारी ने विक्रेता को कड़ी चेतावनी देते हुए निर्देश दिया कि यदि अगली बार बिना हैंडवॉश, बिना ग्लव्स और बिना शुद्धता के सामान बेचते हुए पाया गया, तो न केवल ठेला जब्त किया जाएगा बल्कि भारी जुर्माना भी वसूला जाएगा।
इस घटना से स्ट्रीट फूड विक्रेताओं को मिलने वाली सीख और प्रशासन का आगे का कड़ा रुख
गोलगप्पे के ठेले पर हुई इस औचक कार्रवाई और उसके बाद फैली चर्चा ने पूरे शहर के फूड वेंडर्स और चाट-पकौड़ी बेचने वालों को अंदर से हिला कर रख दिया है। इस घटना के बाद स्थानीय नगर निगम और खाद्य सुरक्षा विभाग ने भी यह घोषणा कर दी है कि आने वाले दिनों में शहर के सभी रेहड़ी-पटरी और स्ट्रीट फूड ठेलों का बड़े पैमाने पर सेफ्टी ऑडिट किया जाएगा ताकि जनता के स्वास्थ्य के साथ कोई खिलवाड़ न हो सके। वेंडर्स को अब खुद ही आगे बढ़कर हैंडवॉश, ग्लव्स, साफ पानी और फूड ग्रेड रैपर या बर्तनों का इस्तेमाल करने की आदत डालनी होगी ताकि उनका व्यवसाय भी चलता रहे और ग्राहकों की सेहत भी सुरक्षित रहे। एक आम नागरिक के तौर पर भी हमें यह समझना होगा कि ठेले पर कुछ भी खाने से पहले साफ-सफाई के मानकों की जांच जरूर करें, क्योंकि 'पहला सुख निरोगी काया' ही हमारे जीवन का सबसे बड़ा सच है।