नेमरा में जहां गुरुजी पंचतत्व में हुए विलीन, उसी के बगल में होगा रूपी सोरेन का अंतिम संस्कार

नेमरा में जहां गुरुजी पंचतत्व में हुए विलीन, उसी के बगल में होगा रूपी सोरेन का अंतिम संस्कार

झारखंड की राजनीति, संस्कृति और माटी से जुड़ी एक बेहद दुखद और मर्माहत करने वाली खबर सामने आ रही है, जिसने पूरे राज्य के साथ-साथ देश भर के राजनीतिक गलियारों को गमगीन कर दिया है। झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) के संस्थापक और राज्य के दिग्गज नेता शिबू सोरेन, जिन्हें आदर से पूरा झारखंड 'गुरुजी' के नाम से जानता है, के निधन के बाद अब उनके परिवार से एक और अत्यंत दुखद प्रसंग सामने आया है। कुछ ही समय पहले नेमरा गांव की जिस पवित्र धरती पर गुरुजी पंचतत्व में विलीन हुए थे और जहां उनकी यादें आज भी जीवित हैं, ठीक उसी ऐतिहासिक स्थल के बगल में अब उनकी धर्मपत्नी रूपी सोरेन का भी अंतिम संस्कार संपन्न होने जा रहा है। इस अपूर्व क्षति और एक के बाद एक दो बड़े दुखों से पूरे सोरेन परिवार और राज्य में शोक की लहर दौड़ गई है। इस दुखद घड़ी में देश की महामहिम राष्ट्रपति द्रौपदी मुरमू और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत देश के तमाम दिग्गज नेताओं ने गहरा शोक व्यक्त किया है और शोकाकुल परिवार के प्रति अपनी संवेदनाएं प्रकट की हैं।

नेमरा गांव का वह ऐतिहासिक और पावन प्रांगण: जहां इतिहास के दो बड़े अध्याय एक ही मिट्टी में समा रहे हैं

झारखंड के रामगढ़ जिले के अंतर्गत आने वाला नेमरा गांव यूं तो एक साधारण ग्रामीण इलाका है, लेकिन झारखंड के राजनीतिक इतिहास में इस गांव को सबसे पवित्र और प्रेरणादायक भूमि का दर्जा प्राप्त है। कुछ समय पहले जब झारखंड की राजनीति के पर्याय बन चुके 'गुरुजी' शिबू सोरेन का निधन हुआ था, तो इसी नेमरा गांव में उनके पार्थिव शरीर को पूरे राजकीय सम्मान के साथ पंचतत्व में विलीन किया गया था, जहां आज भी उनकी समाधि स्थल पर हज़ारों लोग श्रद्धांजलि देने पहुंचते हैं। अब ठीक उसी समाधि स्थल के बगल में रूपी सोरेन का अंतिम संस्कार किए जाने का निर्णय लिया गया है, जिससे यह पूरा प्रांगण झारखंड के एक पूरे राजनीतिक युग और उसके संघर्षों का सबसे बड़ा साक्षी बन गया है। नेमरा की इस माटी ने एक ऐसे कद्दावर नेता को जन्म दिया जिसने झारखंड को अलग राज्य दिलाने के लिए अपनी पूरी जिंदगी संघर्ष की आग में झोंक दी, और अब उनकी जीवनसंगिनी का उसी पवित्र भूमि पर विलीन होना स्थानीय लोगों और समर्थकों के लिए आंसुओं को रोक पाना नामुमकिन बना रहा है।

राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री का शोक संदेश: देश के शीर्ष नेतृत्व ने सोरेन परिवार के इस दुखद क्षण में बंधाया ढांढस

इस कठिन और दुखद परिस्थिति में देश के सर्वोच्च संवैधानिक पदों पर बैठे नेतृत्व ने त्वरित संवेदना व्यक्त करते हुए सोरेन परिवार के प्रति अपनी गहरी सहानुभूति प्रकट की है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुरमू ने अपने शोक संदेश में कहा कि रूपी सोरेन का निधन न केवल सोरेन परिवार के लिए बल्कि पूरे झारखंड के सामाजिक जीवन के लिए एक अपूरणीय क्षति है, जिन्होंने हमेशा सादगी और सेवा का मार्ग अपनाया। वहीं, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी सोशल मीडिया और आधिकारिक बयानों के जरिए अपनी संवेदनाएं व्यक्त करते हुए कहा कि गुरुजी के परिवार के साथ उनका पुराना और आत्मीय नाता रहा है, और इस दुख की घड़ी में पूरा देश मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और उनके पूरे परिवार के साथ मजबूती से खड़ा है। देश के दिग्गजों द्वारा इस प्रकार शोक व्यक्त करना यह साबित करता है कि सोरेन परिवार का झारखंड के निर्माण और भारतीय राजनीति में कितना बड़ा और सम्मानित योगदान रहा है, जिसे कभी भुलाया नहीं जा सकता।

झारखंड की राजनीति के एक युग का अवसान और नेमरा में उमड़ा जनसैलाब: शोक में डूबा पूरा राज्य

रूपी सोरेन के अंतिम संस्कार और नेमरा में होने वाले इस अंतिम विदाई समारोह में शामिल होने के लिए झारखंड के कोने-कोने से हजारों की संख्या में पार्टी कार्यकर्ता, आम नागरिक, विधायक, मंत्री और विभिन्न दलों के नेता नेमरा पहुंच रहे हैं। सुरक्षा के व्यापक इंतजामों के बीच इस ऐतिहासिक गांव की हर गली इस समय नम आंखों और भारी मन से अपने प्रिय नेताओं को याद कर रही है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि शिबू सोरेन और रूपी सोरेन का इस प्रकार दुनिया से जाना झारखंड के राजनीतिक पटल पर एक ऐसे स्वर्णिम और संघर्षशील अध्याय का समापन है जिसकी जगह कोई और नहीं ले सकता। आने वाले दिनों में नेमरा का यह स्थल झारखंड के इतिहास में एक बड़े तीर्थ और प्रेरणा स्थल के रूप में याद किया जाएगा, जहां आकर हर कोई इन महान व्यक्तित्वों के संघर्षों को नमन करेगा। ईश्वर से प्रार्थना है कि वे दिवंगत आत्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान दें और शोकाकुल परिवार को इस वज्रपात को सहने की शक्ति प्रदान करें।