Jharkhand News : झारखंड का राजभवन, देश की राजनीति का पावर हाउस? राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति दोनों यहीं से
News India Live, Digital Desk: यह कोई मामूली बात नहीं है, बल्कि झारखंड के लिए एक अनूठी उपलब्धि है। देश के दो सबसे बड़े संवैधानिक पदों पर आज वो दो शख्सियतें बैठी हैं, जिन्होंने कभी झारखंड के राज्यपाल के तौर पर राज्य को अपनी सेवाएं दी थीं। हम बात कर रहे हैं भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु और नवनिर्वाचित उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन की। यह एक ऐसा अद्भुत संयोग है जिसने रांची के राजभवन को देश की राजनीति के नक्शे पर एक खास जगह दिला दी है।
एक संयोग जो बना इतिहास
देश के राजनीतिक इतिहास में शायद यह पहली बार हो रहा है कि राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति, दोनों का एक ही राज्य के राजभवन से सीधा जुड़ाव रहा हो। द्रौपदी मुर्मु, जो 18 मई 2015 से 13 जुलाई 2021 तक झारखंड की 9वीं राज्यपाल थीं, आज देश की 15वीं राष्ट्रपति हैं। उन्होंने न सिर्फ झारखंड की पहली महिला राज्यपाल बनकर इतिहास रचा था, बल्कि अब देश की पहली आदिवासी महिला राष्ट्रपति बनकर वे करोड़ों लोगों के लिए प्रेरणा बन चुकी हैं।
वहीं, सीपी राधाकृष्णन ने 18 फरवरी 2023 से 30 जुलाई 2024 तक राज्य के 11वें राज्यपाल के रूप में कार्य किया। उनके कार्यकाल में राज्य ने कई बड़े राजनीतिक उतार-चढ़ाव देखे। अब वे देश के 15वें उपराष्ट्रपति चुने गए हैं, जिससे झारखंड का नाम एक बार फिर राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में है।
दोनों के कार्यकाल की खास बातें
द्रौपदी मुर्मु: बतौर राज्यपाल, द्रौपदी मुर्मु का कार्यकाल काफी स्थिर और लंबा रहा। उन्होंने राज्य के विश्वविद्यालयों की शिक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए कई कदम उठाए और हमेशा आदिवासी समाज के अधिकारों के लिए मुखर रहीं। उनका सरल स्वभाव और आम लोगों से जुड़ने का तरीका आज भी याद किया जाता है।
सीपी राधाकृष्णन: सीपी राधाकृष्णन का कार्यकाल भले ही छोटा रहा, लेकिन राजनीतिक रूप से काफी हलचल भरा रहा। उनके समय में ही तत्कालीन मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को जेल जाना पड़ा और चंपाई सोरेन ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी। वे भ्रष्टाचार के मुद्दों पर काफी सख्त माने जाते थे और उन्होंने 1932 के खतियान जैसे कई महत्वपूर्ण विधेयकों को कानूनी सलाह के लिए सरकार को लौटा दिया था।
यह ऐतिहासिक उपलब्धि झारखंड के लोगों के लिए गर्व का विषय है। एक ही राज्य से दो पूर्व राज्यपालों का देश के सर्वोच्च पदों पर पहुंचना यह दिखाता है कि झारखंड की भूमि में कुछ तो खास है। अब पूरा देश यह देख रहा है कि ये दोनों नेता मिलकर देश को किस नई दिशा में ले जाते हैं।