Bangladesh Elections: क्या तारिक रहमान के आने से बदल जाएंगे भारत-बांग्लादेश के रिश्ते? BNP के मेनिफेस्टो ने दिल्ली में बढ़ाई हलचल
News India Live, Digital Desk: बांग्लादेश की राजनीति में मचे घमासान के बीच विपक्षी दल बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) ने अपना रुख साफ कर दिया है। अगर तारिक रहमान (Tarique Rahman) के नेतृत्व में BNP सत्ता में वापसी करती है, तो भारत के साथ संबंधों की दिशा क्या होगी? पार्टी के ताजा चुनावी घोषणापत्र (Manifesto) ने न केवल ढाका, बल्कि दिल्ली के रणनीतिक गलियारों में भी बड़ी चर्चा छेड़ दी है।
भारत के साथ संबंधों पर BNP का नया 'गेम प्लान'
ऐतिहासिक रूप से BNP को भारत के प्रति 'सख्त' रुख रखने वाला दल माना जाता रहा है, लेकिन इस बार सुर थोड़े बदले हुए नजर आ रहे हैं। घोषणापत्र में 'पारस्परिक सम्मान' और 'समानता' की बात कही गई है।
BNP के मेनिफेस्टो की 3 बड़ी बातें:
संप्रभुता सर्वोपरि: पार्टी का कहना है कि भारत के साथ रिश्ते मजबूत होंगे, लेकिन बांग्लादेश के आंतरिक मामलों में किसी भी तरह का हस्तक्षेप बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
तीस्ता जल विवाद: लंबे समय से लंबित तीस्ता नदी जल समझौते (Teesta Water Dispute) पर BNP ने कड़ा रुख अपनाते हुए इसे अपनी प्राथमिकता बताया है।
कनेक्टिविटी और ट्रांजिट: व्यापार के लिए ट्रांजिट सुविधाओं पर फिर से विचार करने के संकेत दिए गए हैं, जो भारत के पूर्वोत्तर राज्यों (North-East India) के लिए बेहद संवेदनशील मुद्दा है।
तारिक रहमान की भूमिका और चुनौतियां
लंदन में निर्वासित जीवन बिता रहे तारिक रहमान BNP के 'पावर सेंटर' हैं। उनके नेतृत्व में पार्टी यह संदेश देना चाहती है कि वह पुरानी छवि को बदलकर एक आधुनिक और संतुलित विदेश नीति अपनाएगी। हालांकि, भारत के लिए चिंता का विषय BNP की कट्टरपंथी दलों (जैसे जमात-ए-इस्लामी) के साथ पुरानी नजदीकी रही है।
क्या दिल्ली के लिए बढ़ेगी मुश्किल?
भारत ने हमेशा बांग्लादेश में 'स्थिरता' का समर्थन किया है। शेख हसीना सरकार के दौरान भारत-बांग्लादेश संबंधों को 'स्वर्ण युग' कहा गया। ऐसे में सत्ता परिवर्तन की आहट ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं:
क्या पूर्वोत्तर में उग्रवाद के खिलाफ मिलने वाला सहयोग जारी रहेगा?
क्या चीन को काउंटर करने में बांग्लादेश भारत का साथ देगा?
क्या बॉर्डर पर होने वाली घुसपैठ और तस्करी पर लगाम लगेगी?
विशेषज्ञों की राय
Foreign Policy विशेषज्ञों का मानना है कि तारिक रहमान के लिए सत्ता में आने के बाद भारत को नजरअंदाज करना नामुमकिन होगा। आर्थिक निर्भरता और भौगोलिक स्थिति ऐसी है कि दोनों देशों को एक-दूसरे की जरूरत है। BNP का मेनिफेस्टो एक 'कूटनीतिक संतुलन' बनाने की कोशिश है।