Jalaun Court Verdict: उरई में रिटायर इंजीनियर पर कोर्ट का हंटर! 18 साल पुराने घोटाले में रिकवरी का आदेश, नहीं चुकाया पैसा तो रुकेगी पेंशन
उरई (जालौन)। भ्रष्टाचार और सरकारी धन की बर्बादी के खिलाफ उरई की सिविल अदालत ने एक ऐतिहासिक और कड़ा फैसला सुनाया है। लोक निर्माण विभाग (PWD) के एक पूर्व अधिशासी अभियंता (XEN) को 18 साल पहले सड़क निर्माण में की गई गड़बड़ी अब भारी पड़ गई है। सिविल जज (जूनियर डिवीजन) प्रत्यूष प्रकाश ने सेवानिवृत्त अभियंता नरेंद्र प्रकाश को सरकारी धन की क्षति का दोषी मानते हुए 92,780 रुपये की वसूली का आदेश दिया है।
अदालत ने साफ कर दिया है कि भ्रष्टाचार के मामलों में सेवानिवृत्ति (Retirement) कोई ढाल नहीं बन सकती।
क्या है पूरा मामला? (2006 की वो सड़क और 'खेल')
यह मामला साल 2006 का है, जब उरई के हमीरपुर-कालपी मार्ग पर किलोमीटर 31 से 51.900 तक सड़क चौड़ीकरण और सुदृढ़ीकरण का कार्य 'सेंट्रल रोड फंड' (CRF) योजना के तहत कराया जा रहा था। उस दौरान नरेंद्र प्रकाश पीडब्ल्यूडी निर्माण खंड-3 में अधिशासी अभियंता के पद पर तैनात थे।
गुणवत्ता पर सवाल: निर्माण कार्य पूरा होने के बाद इसकी गुणवत्ता को लेकर शासन स्तर पर गंभीर शिकायतें दर्ज कराई गई थीं।
जांच में खुली पोल: शिकायतों के बाद शासन ने टेक्निकल स्क्रूटनी टीम (TST) का गठन किया। टीम ने 2008 में सौंपी अपनी रिपोर्ट में खुलासा किया कि सड़क निर्माण में मानकों की अनदेखी की गई, जिससे सरकारी खजाने को 92,780 रुपये की सीधी चपत लगी।
60 दिन की मोहलत, वरना पेंशन पर लगेगा 'ब्रेक'
अदालत ने वाद संख्या 212/2014 की सुनवाई करते हुए अपना एकपक्षीय निर्णय सुनाया। फैसले के मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं:
जमा करनी होगी राशि: नरेंद्र प्रकाश को आदेश की तारीख से 60 दिनों के भीतर पूरी धनराशि राज्य सरकार के खजाने में जमा करनी होगी।
पेंशन रोकने का आदेश: यदि तय समय सीमा के भीतर रिकवरी की राशि जमा नहीं की जाती है, तो संबंधित विभाग को उनकी पेंशन रोकने के सख्त निर्देश दिए गए हैं।
सरकारी गवाह: सुनवाई के दौरान विभाग की ओर से अपर अभियंता राधेश्याम सिंह ने गवाही दी और शपथ पत्र के जरिए अनियमितताओं की पुष्टि की।
भ्रष्टाचार के खिलाफ एक बड़ा संदेश
डीजीसी सिविल ने इस फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि यह निर्णय सरकारी धन की सुरक्षा और अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा। अक्सर अधिकारी यह समझते हैं कि रिटायरमेंट के बाद पुराने मामले दब जाएंगे, लेकिन इस फैसले ने स्पष्ट कर दिया है कि कानून के हाथ बहुत लंबे हैं।