Jal Jeevan Mission Scam : राजस्थान सरकार ने दी पूर्व ACS के खिलाफ जांच की मंजूरी, अब खुलेंगे बड़े राज
News India Live, Digital Desk : राजस्थान में पानी की कीमत हम से बेहतर कौन जान सकता है? केंद्र सरकार ने 'जल जीवन मिशन' (JJM) इसलिए शुरू किया था ताकि रेगिस्तान के हर घर में नल से जल पहुँचे। लेकिन अफ़सोस, पिछली सरकार के दौरान ख़बरें आईं कि पानी की लाइन बिछाने के नाम पर कुछ लोगों ने अपनी जेबें भरने की 'लाइन' बिछा ली।
अब राजस्थान की भजनलाल शर्मा सरकार ने ठान लिया है कि इस "पानी वाले घोटाले" का सच बाहर लाकर ही मानेंगे। एक बहुत बड़ी खबर जयपुर से आई है जिसने पूरी ब्यूरोक्रेसी (अफसरशाही) की नींद उड़ा दी है। सरकार ने जल जीवन मिशन (JJM) में हुई कथित अनियमितताओं को लेकर जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग (PHED) के पूर्व अतिरिक्त मुख्य सचिव (ACS) के खिलाफ जांच की मंजूरी दे दी है।
आइये, बिल्कुल आसान शब्दों में समझते हैं कि यह पूरा मामला क्या है और एसीबी (ACB) अब क्या करने वाली है।
कौन हैं वो बड़े 'साहब'?
जिनके खिलाफ जांच की अनुमति मिली है, वो कोई छोटे-मोटे कर्मचारी नहीं, बल्कि प्रशासन के सबसे ऊंचे पदों पर रहे सीनियर आईएएस अधिकारी (अब पूर्व) हैं। हम बात कर रहे हैं सुबोध अग्रवाल (Subodh Agarwal) की। एसीबी (Anti-Corruption Bureau) को शक है कि उनके कार्यकाल में जल जीवन मिशन के टेंडर्स और कामों में भारी गड़बड़ी हुई थी।
एसीबी के हाथ खुले
दोस्तो, किसी भी आईएएस अधिकारी (चाहे वो रिटायर ही क्यों न हो जाए) के खिलाफ जांच करने के लिए सरकार से धारा 17A के तहत मंजूरी लेनी पड़ती है। एसीबी ने बहुत पहले ही सरकार को चिट्ठी लिखकर सुबोध अग्रवाल और कुछ अन्य अधिकारियों के खिलाफ जांच की इजाजत मांगी थी।
अब भजनलाल सरकार ने उस फाइल पर 'हां' की मुहर लगा दी है। इसका मतलब है कि एसीबी अब उनसे कड़ाई से पूछताछ कर सकती है और सबूतों को खंगाल सकती है।
घोटाला आखिर है क्या?
आरोप है कि जेजेएम (JJM) के तहत हज़ारों करोड़ के टेंडर चहेती कंपनियों को दिए गए।
- फर्जी सर्टिफिकेट: कंपनियों ने काम लेने के लिए नकली अनुभव प्रमाण पत्र (Experience Certificates) लगाए, और अफसरों ने आँखें मूंदकर उन्हें पास कर दिया।
- घटिया पाइप: खबर तो यहाँ तक थी कि पुरानी और घटिया क्वालिटी की पाइपें जमीन में गाड़ दी गईं और पैसे नए के उठा लिए गए।
एसीबी का मानना है कि इतना बड़ा खेल बिना ऊपर बैठे "बड़े साहबों" की मिलीभगत के हो ही नहीं सकता।
सरकार का कड़ा संदेश
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने पहले ही साफ़ कर दिया था कि भ्रष्टाचार के मामले में "ज़ीरो टॉलरेंस" की नीति अपनाई जाएगी। पूर्व एसीएस के खिलाफ जांच की मंजूरी देकर सरकार ने यह संदेश दे दिया है कि पद चाहे कितना भी बड़ा हो, अगर जनता के पैसे का गबन हुआ है, तो हिसाब देना होगा।
आगे क्या?
अब एसीबी की टीम पूर्व एसीएस सुबोध अग्रवाल को पूछताछ के लिए बुला सकती है। ईडी (ED) भी पहले ही इस मामले में कई जगह छापे मार चुकी है। तो कुल मिलाकर, आने वाले दिन राजस्थान के कुछ बड़े चेहरों के लिए काफी मुश्किल भरे हो सकते हैं।
आपका क्या मानना है? क्या सरकारी योजनाओं में हो रही इस लूट पर लगाम लगाने का यह सही तरीका है?