पश्चिम एशिया संकट पर जयशंकर का बड़ा बयान, ईरानी युद्धपोत को पनाह देने पर दी सफाई सदन में भारी हंगामा

Post

News India Live, Digital Desk : राज्यसभा में सोमवार को विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने पश्चिम एशिया की अस्थिर स्थिति पर भारत का रुख स्पष्ट किया। जयशंकर ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खुद इस स्थिति की निगरानी कर रहे हैं और भारत की प्राथमिकता क्षेत्र में रहने वाले 1 करोड़ भारतीयों की सुरक्षा और ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करना है। हालांकि, जब मंत्री अपना बयान दे रहे थे, तब विपक्ष के हंगामे और नारेबाजी के कारण सदन का माहौल काफी गरमा गया।

ईरानी युद्धपोत 'IRIS Lavan' को क्यों दी जगह?

विदेश मंत्री ने उन सवालों का जवाब दिया जो पिछले कुछ दिनों से चर्चा में थे:

मानवीय आधार: जयशंकर ने स्पष्ट किया कि ईरानी युद्धपोत IRIS Lavan को तकनीकी खराबी और मानवीय आधार (Humanitarian Grounds) पर कोच्चि पोर्ट पर रुकने की अनुमति दी गई थी।

अंतरराष्ट्रीय कानून: उन्होंने कहा कि भारत अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानूनों का सम्मान करता है, लेकिन संकट में फंसे चालक दल की मदद करना भारत की परंपरा रही है।

IRIS Dena का डूबना: उन्होंने श्रीलंका के पास अमेरिकी पनडुब्बी द्वारा ईरानी जहाज 'IRIS Dena' को डुबाए जाने की घटना को 'दुर्भाग्यपूर्ण' बताया और कहा कि भारत ने खोज एवं बचाव अभियान में मदद की थी।

सदन में हंगामा: सभापति ने क्यों जोड़े हाथ?

बयान के दौरान कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने सरकार पर "चुप्पी" साधने का आरोप लगाते हुए जबरदस्त नारेबाजी की।

मल्लिकार्जुन खड़गे का विरोध: विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने मांग की कि इस संवेदनशील मुद्दे पर केवल बयान नहीं, बल्कि पूरी चर्चा होनी चाहिए। विपक्ष का आरोप था कि सरकार भारतीय हितों और समुद्री सुरक्षा पर स्पष्ट स्टैंड नहीं ले रही है।

सभापति का हस्तक्षेप: सदन में शोर-शराबा इतना बढ़ गया कि सभापति ने विपक्षी सांसदों से शांत रहने की अपील करते हुए हाथ जोड़े और गरिमा बनाए रखने का आग्रह किया। हालांकि, गतिरोध कम न होने पर विपक्ष ने सदन से वॉकआउट (Walkout) कर दिया।

जयशंकर के संबोधन की 3 मुख्य बातें:

भारतीयों की वापसी: अब तक लगभग 67,000 भारतीय प्रभावित क्षेत्र से वापस आ चुके हैं। तेहरान में भारतीय दूतावास हाई अलर्ट पर है।

सप्लाई चेन का खतरा: जयशंकर ने चेतावनी दी कि अगर युद्ध लंबा चला तो तेल और गैस की सप्लाई चेन बुरी तरह प्रभावित होगी, जिससे भारतीय उपभोक्ताओं पर सीधा असर पड़ेगा।

शांति की अपील: भारत ने एक बार फिर सभी पक्षों से संयम बरतने और 'संवाद व कूटनीति' (Dialogue and Diplomacy) के रास्ते पर लौटने का आह्वान किया।