F-35 विमानों पर झगड़ा ,क्या अमेरिका और कनाडा के डिफेंस भरोसे में दरार आ गई है?
News India Live, Digital Desk: जब बात अमेरिका और कनाडा की सुरक्षा की आती है, तो ये दोनों मिलकर काम करते हैं। ये रिश्ता सिर्फ पड़ोसी का नहीं, बल्कि अटूट डिफेंस पार्टनरशिप का भी है। इस पार्टनरशिप की जान है NORAD।
मामला क्या है? F-35 की क्या भूमिका है?
F-35 फाइटर जेट को दुनिया के सबसे आधुनिक, यानी पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमानों (Fifth Generation Fighter Aircraft) में गिना जाता है। अमेरिका और उसके प्रमुख सहयोगी देश इसी जेट का उपयोग करके अपनी हवाई सुरक्षा सुनिश्चित करते हैं।
अब कनाडा को भी अपनी पुरानी फ्लीट (पुराने लड़ाकू विमान) को बदलने के लिए F-35 जेट्स खरीदने थे, ताकि NORAD सिस्टम को अपग्रेड किया जा सके। कनाडा कई सालों तक इन जेट्स की खरीद में देरी करता रहा, या कहें कि इस पर सही निर्णय नहीं ले पाया। कुछ साल पहले उन्होंने दूसरी कंपनियों के विमान खरीदने का मन भी बना लिया था।
बस यहीं से असली पेंच शुरू हुआ।
जब NORAD के कवच पर खतरा मंडराया
NORAD इन दोनों देशों का वो संयुक्त कमान केंद्र है, जो उत्तरी अमेरिका के हवाई क्षेत्र (North American Airspace) की 24 घंटे सुरक्षा करता है। यह देखना इसका काम है कि कोई भी विदेशी विमान, मिसाइल या ड्रोन उनकी सीमा में न घुस जाए।
NORAD की ताकत तब तक पूरी है जब उसके सदस्य देश, यानी अमेरिका और कनाडा, एक जैसी टेक्नोलॉजी और प्लेटफॉर्म इस्तेमाल करते हैं।
अगर कनाडा पांचवीं पीढ़ी के अत्याधुनिक F-35 लड़ाकू विमान नहीं खरीदता या इसे खरीदने में देरी करता है, तो इसका मतलब है कि NORAD में तकनीक का अंतर (Technology Gap) आ जाएगा। अमेरिका अपने सबसे आधुनिक जेट से सुरक्षा करेगा, जबकि कनाडा पुराने या कम सक्षम जेट्स से। ऐसे में दुश्मनों की पहचान और उन पर जवाबी कार्रवाई में देरी हो सकती है।
पूर्व राजदूत ने क्यों दी तीखी चेतावनी?
इस तनाव को हवा दी अमेरिका के पूर्व राजदूत पीटर हुकस्ट्रा (Pete Hoekstra) ने। उन्होंने इस मुद्दे पर एक बहुत ही सीधी और तल्ख टिप्पणी की। उन्होंने साफ कहा कि अगर कनाडा ने जल्दी से F-35 की डील फाइनल नहीं की और अपनी जिम्मेदारी नहीं निभाई, तो इससे न सिर्फ NORAD का भविष्य खतरे में पड़ जाएगा, बल्कि उत्तरी अमेरिका के डिफेंस ऑपरेशन (North America Defence Operation) पर भी सीधा असर पड़ेगा।
उनकी चिंता साफ़ थी: इस डील में देरी या चूक से अमेरिका और कनाडा के रक्षा संबंध (US-Canada Defense Relationship) और भरोसे पर बुरा असर पड़ सकता है।
फिलहाल, यह देखना बाकी है कि कनाडा सरकार इस सुरक्षा समझौते की गंभीरता को देखते हुए कब F-35 को लेकर अपनी पूरी योजना को लागू करती है। लेकिन एक बात साफ है कि अगर इन दो महाशक्तियों के बीच रक्षा के मुद्दों पर तालमेल बिगड़ता है, तो इसका असर केवल अमेरिका या कनाडा तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह वैश्विक रक्षा रणनीति (Global Defense Strategy) को भी प्रभावित करेगा, जिसमें भारत की रक्षा भागीदारी (India's Defense Partnership) भी एक महत्वपूर्ण अंग है।