पड़ोस में बड़ा खेल अब बांग्लादेश में बनेंगे चीन के ड्रोन, भारत के लिए क्यों बढ़ गई है चिंता
News India Live, Digital Desk: दक्षिण एशिया की राजनीति और रक्षा समीकरण हमेशा से जटिल रहे हैं। और जब मामला भारत के पड़ोसियों से जुड़ा हो और उसमें चीन का एंगल हो, तो बात और भी गंभीर हो जाती है। हाल ही में बांग्लादेश और चीन के बीच एक ऐसी डिफेंस डील हुई है, जिसने भारत की पूर्वी सीमा और समुद्री सुरक्षा पर गहरी नज़र रखने को मजबूर कर दिया है।
डील क्या है और कहां होगी?
खबर यह है कि बांग्लादेश और चीन ने मिलकर एक समझौता किया है। इस समझौते के तहत बांग्लादेश, चीन की मदद से अपने देश में ही अब अनमैन्ड एरियल व्हीकल (UAV) या ड्रोन (Unmanned Aerial Vehicle - Drone) बनाने का काम शुरू करेगा।
यह महत्वाकांक्षी मैन्युफैक्चरिंग फैसिलिटी बांग्लादेश की राजधानी ढाका में ही स्थापित की जाएगी। शुरुआती खबरों के मुताबिक, इसमें चीन के एक एडवांस ट्रेनिंग विमान, जो UAV में भी बदला जा सकता है, F-350 सीरीज के ड्रोन (F-350 Series Drones) का निर्माण किया जाएगा।
चीन का गेम प्लान क्या है?
चीन इस पूरे क्षेत्र में अपनी सैन्य उपस्थिति (Military Presence) और कूटनीतिक पकड़ मजबूत करने के लिए काफी समय से काम कर रहा है। बांग्लादेश को अपनी टेक्नोलॉजी देना चीन की उसी रणनीति का हिस्सा है।
- कम दाम पर हथियार: चीन जानता है कि बांग्लादेश जैसे देशों को हथियार आयात करने के लिए कम दाम वाली डील चाहिए। बांग्लादेश में फैक्ट्री लगाकर वह उन्हें स्थानीय स्तर पर ही उत्पादन (Local Manufacturing) की सुविधा दे रहा है, जिससे ये देश सस्ता डिफेंस गियर पा सकते हैं।
- हिंद महासागर पर नज़र: बांग्लादेश भारत का करीबी पड़ोसी होने के साथ-साथ बंगाल की खाड़ी (Bay of Bengal) पर भी बड़ी समुद्री सीमा रखता है। चीन हमेशा से हिंद महासागर क्षेत्र में सैन्य पहुंच (Military Access to Indian Ocean) बनाना चाहता है। ढाका में ड्रोन मैन्युफैक्चरिंग यूनिट स्थापित करके, वह अप्रत्यक्ष रूप से इस क्षेत्र की सैन्य जासूसी और निगरानी (Surveillance and Monitoring) के लिए अपना बेस तैयार कर रहा है।
- सैन्य निर्यात (Military Export) बढ़ाना: यह समझौता बांग्लादेश और चीन का सैन्य गठबंधन (China-Bangladesh Military Alliance) मजबूत करेगा, जिससे बीजिंग की वैश्विक हथियारों के बाज़ार में हिस्सेदारी बढ़ेगी।
भारत की चिंता क्यों बढ़ी?
किसी भी पड़ोसी देश में, खासकर पूर्वी सीमा (Eastern Border) के पास अगर किसी प्रतिद्वंद्वी देश के सैन्य ड्रोन बनने लगें, तो भारत के लिए चिंता करना स्वाभाविक है।
- सुरक्षा पर खतरा: ये F-350 जैसे ड्रोन या UAV निगरानी और जासूसी के लिए इस्तेमाल हो सकते हैं।
- टेक्नोलॉजी ट्रांसफर: इस डील के बहाने चीन को बांग्लादेश में एक मजबूत स्थायी सैन्य ढांचा बनाने का मौका मिल रहा है, जो भविष्य में भारत की सुरक्षा (India’s Security Concern) के लिए खतरा बन सकता है।
फिलहाल भारत इस पूरी स्थिति पर कड़ी नज़र रखे हुए है, क्योंकि चीन लगातार बांग्लादेश में सैन्य उपकरणों की आपूर्ति (Military Equipment Supply to Bangladesh) बढ़ाकर अपनी जगह पक्की करने में लगा है।