ईरान का महाप्रहार अमेरिका को दिया गहरा जख्म, अब तक 16 फाइटर जेट्स और 10 रीपर ड्रोन्स ढेर
News India Live, Digital Desk: मिडिल ईस्ट के रणक्षेत्र से एक ऐसी खबर आ रही है जिसने सुपरपावर अमेरिका के सैन्य गौरव को हिलाकर रख दिया है। ईरान और उसके समर्थित गुटों ने अमेरिकी वायुसेना पर अब तक का सबसे घातक हमला बोला है। ताजा रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान ने अत्याधुनिक मिसाइल डिफेंस सिस्टम का इस्तेमाल करते हुए अमेरिका के 16 लड़ाकू विमानों (Fighter Jets) को मार गिराया है। इतना ही नहीं, आसमान में 'अजेय' माने जाने वाले 10 खतरनाक रीपर ड्रोन्स (MQ-9 Reaper Drones) को भी मलबे में तब्दील कर दिया गया है।
ईरान का पलटवार: कैसे लगे इतने बड़े जख्म?
ईरान ने दावा किया है कि उसकी सीमा और प्रभाव क्षेत्र में घुसपैठ करने वाले अमेरिकी विमानों को 'बावर-373' (Bavar-373) और 'खोरमशहर' जैसी लंबी दूरी की मिसाइलों से निशाना बनाया गया है।
हवाई दबदबे को चुनौती: पिछले कुछ हफ्तों में हुए इन हमलों ने यह साबित कर दिया है कि ईरान की रडार और जैमिंग तकनीक अब पहले से कहीं अधिक घातक हो गई है।
रणनीतिक नुकसान: 16 फाइटर जेट्स का गिरना केवल एक संख्या नहीं है, बल्कि अमेरिका के लिए अरबों डॉलर का वित्तीय और सैन्य नुकसान है।
10 रीपर ड्रोन्स का शिकार: अमेरिका की 'आंखें' बंद
MQ-9 रीपर ड्रोन्स को अमेरिका की खुफिया निगरानी और सटीक हमलों की रीढ़ माना जाता है।
खतरनाक आंकड़े: एक ही संघर्ष में 10 रीपर ड्रोन्स का गिरना अमेरिकी ड्रोन प्रोग्राम के लिए एक बड़ा झटका है।
खुफिया तंत्र पर असर: इन ड्रोन्स के गिरने से पेंटागन को जमीनी जानकारी जुटाने और टारगेट फिक्स करने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
मिडिल ईस्ट में बढ़ता तनाव: क्या शुरू होगा 'तीसरा विश्व युद्ध'?
ईरान के इस आक्रामक रुख ने वॉशिंगटन में हड़कंप मचा दिया है। अमेरिकी राष्ट्रपति और पेंटागन के अधिकारी अब जवाबी कार्रवाई की योजना बना रहे हैं।
इजरायल का रुख: ईरान के इस कड़े प्रहार के बाद इजरायल ने भी अपनी वायुसेना को हाई अलर्ट पर रखा है।
वैश्विक तेल संकट: युद्ध के इस स्तर पर पहुँचने से दुनिया भर में कच्चे तेल की कीमतें रिकॉर्ड स्तर को छू सकती हैं, जिसका सीधा असर भारत समेत सभी देशों की अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा।