Iran New Leader : कौन हैं मोजतबा खामेनेई? ईरान के नए सुप्रीम लीडर जिनके एक फैसले से कांप उठी दुनिया

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News India Live, Digital Desk: ईरान में एक नए युग की शुरुआत हो चुकी है। अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत के बाद उनके 56 वर्षीय बेटे मोजतबा खामेनेई (Mojtaba Khamenei) को ईरान का नया 'सुप्रीम लीडर' चुना गया है। यह फैसला ऐसे समय में आया है जब ईरान, अमेरिका और इजरायल के साथ सीधे युद्ध में उलझा हुआ है। मोजतबा का चयन न केवल ईरान, बल्कि पूरी दुनिया की राजनीति के लिए एक टर्निंग पॉइंट साबित हो सकता है।

मोजतबा खामेनेई: 'शैडो प्रिंस' से 'सुप्रीम लीडर' तक का सफर

मोजतबा खामेनेई को लंबे समय तक ईरान का 'शैडो प्रिंस' कहा जाता था। वे अपने पिता के सबसे भरोसेमंद सलाहकार और गेटकीपर थे।

पर्दे के पीछे की ताकत: मोजतबा ने कभी कोई आधिकारिक सरकारी पद नहीं संभाला, लेकिन वे पिछले दो दशकों से 'बेत' (सुप्रीम लीडर के कार्यालय) का सारा कामकाज देख रहे थे।

IRGC से गहरा नाता: मोजतबा के संबंध ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) के साथ बेहद मजबूत हैं। कहा जाता है कि IRGC के दबाव में ही 'असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स' ने उन्हें इस पद के लिए चुना है।

सैन्य अनुभव: उन्होंने 1980 के दशक में ईरान-इराक युद्ध के दौरान अपनी सेवाएं दी थीं, जिससे सेना में उनकी स्वीकार्यता बढ़ी।

ईरान की राजनीति में क्यों हो रहा है विरोध?

मोजतबा का चयन ईरान के इतिहास में पहली बार 'वंशानुगत उत्तराधिकार' (Hereditary Succession) को दर्शाता है। 1979 की इस्लामी क्रांति असल में 'राजशाही' को खत्म करने के लिए हुई थी। अब पिता के बाद बेटे का सर्वोच्च पद पर बैठना कई लोगों को 'नई राजशाही' जैसा लग रहा है, जिससे आंतरिक विद्रोह की आशंका बढ़ गई है।

मोजतबा के आने से क्या बदलेगा?

विशेषज्ञों का मानना है कि मोजतबा अपने पिता से भी अधिक 'कट्टरपंथी' (Hardline) रुख अपना सकते हैं:

युद्ध की रणनीति: मोजतबा के नेतृत्व में ईरान इजरायल और अमेरिका के खिलाफ और भी आक्रामक हो सकता है। वे परमाणु कार्यक्रम को और तेज करने का आदेश दे सकते हैं।

ट्रंप की चुनौती: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पहले ही मोजतबा को "अस्वीकार्य" बताया है। ऐसे में अमेरिका ईरान पर और भी कड़े प्रतिबंध लगा सकता है।

भारत के साथ संबंध: भारत के लिए यह स्थिति चुनौतीपूर्ण है। ईरान के साथ भारत के रणनीतिक संबंध (जैसे चाबहार पोर्ट) हैं, लेकिन मोजतबा की कट्टरपंथी नीतियां भारत को कूटनीतिक संतुलन बनाने पर मजबूर करेंगी।

क्या मोजतबा बचा पाएंगे ईरान को?

ईरान इस वक्त चौतरफा संकट में है। आसमान काला है, अर्थव्यवस्था चरमरा रही है और इजरायली मिसाइलें तेहरान तक पहुँच रही हैं। मोजतबा खामेनेई के लिए असली चुनौती केवल युद्ध जीतना नहीं, बल्कि ईरान की जनता का विश्वास जीतना होगा, जो इस वक्त बदलाव की मांग कर रही है।