Iran-China Alliance : चीन की शरण में पहुँचा ईरान अमेरिका और इजरायल की घेराबंदी पर ड्रैगन से लगाई गुहार
News India Live, Digital Desk : मध्य पूर्व (मिडल ईस्ट) में इजरायल के साथ जारी खूनी संघर्ष और अमेरिका के कड़े तेवरों के बीच ईरान ने एक बड़ा कूटनीतिक दांव चला है। ईरान के शीर्ष नेतृत्व ने चीन के साथ उच्च स्तरीय वार्ता कर वाशिंगटन और तेल अवीव की 'खतरनाक' रणनीतियों पर विस्तार से चर्चा की है। ईरान ने स्पष्ट तौर पर चीन से हस्तक्षेप करने और क्षेत्र में अमेरिका-इजरायल के बढ़ते प्रभाव को रोकने में मदद मांगी है। इस मुलाकात ने वैश्विक राजनीति में एक नए 'पावर ब्लॉक' के उभरने के संकेत दे दिए हैं, जो आने वाले दिनों में युद्ध की दिशा तय कर सकता है।
अमेरिका और इजरायल के 'खतरनाक इरादों' का कच्चा चिट्ठा
ईरानी विदेश मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार, बीजिंग में हुई इस बैठक में ईरान ने उन सबूतों को चीन के सामने रखा है, जो दर्शाते हैं कि अमेरिका और इजरायल मिलकर पूरे क्षेत्र को अस्थिर करने की योजना बना रहे हैं। ईरान का आरोप है कि तेल अवीव (इजरायल) केवल आत्मरक्षा नहीं कर रहा, बल्कि वाशिंगटन की शह पर ईरान की संप्रभुता को निशाना बना रहा है। ईरान ने चीन को आगाह किया कि यदि इस 'गठबंधन' को नहीं रोका गया, तो खाड़ी क्षेत्र के ऊर्जा संसाधनों और समुद्री व्यापारिक रास्तों (जैसे हॉर्मुज जलडमरूमध्य) पर चीन के अपने हित भी खतरे में पड़ सकते हैं।
चीन की 'चुप्पी' और ईरान की उम्मीदें
दुनिया भर की निगाहें अब चीन के अगले कदम पर टिकी हैं। क्या चीन केवल मौखिक समर्थन देगा या वह ईरान को सैन्य और तकनीकी मदद भी मुहैया कराएगा? रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि चीन इस युद्ध में सीधे कूदने के बजाय ईरान के साथ अपने '25 साल के रणनीतिक समझौते' का इस्तेमाल कर आर्थिक और कूटनीतिक कवच प्रदान कर सकता है। ईरान चाहता है कि चीन संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में अमेरिका और इजरायल के खिलाफ और अधिक मुखर हो, ताकि तेहरान पर लग रहे अंतरराष्ट्रीय दबाव को कम किया जा सके।
भारत और वैश्विक तेल बाजार पर मंडराता खतरा
ईरान और चीन की इस नजदीकी ने भारत समेत उन सभी देशों की चिंता बढ़ा दी है जो ऊर्जा के लिए मिडिल ईस्ट पर निर्भर हैं। यदि चीन सक्रिय रूप से ईरान का पक्ष लेता है, तो यह संघर्ष 'कोल्ड वॉर' जैसी स्थिति में बदल सकता है। इससे कच्चे तेल की कीमतों में अनिश्चितता आएगी और सप्लाई चेन पूरी तरह बाधित हो सकती है। फिलहाल, वाशिंगटन भी इस मुलाकात पर करीबी नजर रखे हुए है और व्हाइट हाउस ने संकेत दिए हैं कि वह किसी भी देश द्वारा ईरान की 'युद्धक क्षमताओं' को बढ़ाने के प्रयास को बर्दाश्त नहीं करेगा।