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March 25 2026 07:16 pm

ईरान अब नहीं बनाएगा परमाणु हथियार, ट्रंप का बड़ा दावा हॉर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर अमेरिका को मिला बड़ा तोहफा

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News India Live, Digital Desk : मध्य पूर्व (मिडल ईस्ट) में जारी युद्ध की भीषण आशंकाओं के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक ऐसा धमाका किया है, जिसने वैश्विक राजनीति की दिशा बदल दी है। ट्रंप ने दावा किया है कि ईरान आधिकारिक तौर पर 'परमाणु हथियार' (Nuclear Weapons) न बनाने की शर्त पर सहमत हो गया है। इतना ही नहीं, ट्रंप ने यह भी खुलासा किया है कि ईरान ने अमेरिका को 'हॉर्मुज जलडमरूमध्य' (Strait of Hormuz) से जुड़ा एक 'बड़ा तोहफा' (Big Present) भेजा है, जिससे वैश्विक तेल आपूर्ति और समुद्री सुरक्षा का संकट काफी हद तक टल सकता है।

हॉर्मुज जलडमरूमध्य पर ईरान का 'सरप्राइज' समझौता

दुनिया के सबसे संवेदनशील समुद्री रास्ते 'हॉर्मुज जलडमरूमध्य' को लेकर ईरान का नरम पड़ना सबसे चौंकाने वाली खबर है। ट्रंप के मुताबिक, ईरान ने इस रास्ते से व्यापारिक जहाजों और तेल टैंकरों की सुरक्षित आवाजाही की गारंटी दी है। इसे अमेरिका के लिए एक 'बड़े तोहफे' के रूप में देखा जा रहा है क्योंकि इसी रास्ते से दुनिया का 20% से अधिक कच्चा तेल गुजरता है। ईरान ने पहले इस रास्ते को बंद करने की धमकी दी थी, लेकिन अब उसके रुख में आए इस बदलाव को ट्रंप प्रशासन की 'प्रेशर टैक्टिक्स' (Pressure Tactics) की बड़ी जीत माना जा रहा है।

क्या वाकई थम जाएगी परमाणु हथियारों की दौड़?

डोनाल्ड ट्रंप ने अपने बयान में जोर देकर कहा कि ईरान अब समझ गया है कि परमाणु शक्ति बनने की उसकी जिद उसे पूरी तरह तबाह कर सकती है। ट्रंप ने कहा, "मैंने हमेशा कहा था कि ईरान के पास कभी परमाणु हथियार नहीं होंगे, और अब वे इस पर सहमत हैं। वे एक नया भविष्य चाहते हैं।" हालांकि, इस समझौते के बदले में ईरान ने अमेरिका से आर्थिक प्रतिबंधों (Sanctions) को हटाने और अपनी जमी हुई संपत्ति को वापस करने की मांग रखी है। अगर यह डील औपचारिक रूप से लागू होती है, तो यह सदी का सबसे बड़ा कूटनीतिक समझौता साबित होगा।

भारत और वैश्विक अर्थव्यवस्था को बड़ी राहत

इस खबर का सबसे सकारात्मक असर भारत जैसे देशों पर पड़ेगा। हॉर्मुज जलडमरूमध्य के सुरक्षित होने से भारत की ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित होगी और कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट आ सकती है। इससे पेट्रोल-डीजल के दाम कम होने की उम्मीद जगी है। साथ ही, 'तीसरे विश्व युद्ध' का जो डर पिछले कई महीनों से बना हुआ था, वह अब काफी हद तक कम होता दिख रहा है। हालांकि, इजरायल अभी भी इस घटनाक्रम पर सतर्क है और वह ईरान के इन वादों की जमीनी पुष्टि का इंतजार कर रहा है।