सिंधु जल समझौते पर भारत की सबसे बड़ी सर्जिकल स्ट्राइक, क्या वाकई प्यासा रह जाएगा पाकिस्तान?

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News India Live, Digital Desk : पिछले कुछ दिनों से कश्मीर में बढ़ते हमलों और पाकिस्तान की लगातार नापाक हरकतों ने भारत के सब्र का बांध तोड़ दिया है। सालों से हम एक ऐसा समझौता निभाते आ रहे थे जिसमें भारत ने हमेशा दरियादिली दिखाई, लेकिन अब भारत ने कह दिया है कि "बहुत हुआ।"

क्या है यह नया 'वाटर' टेंशन?
ताजा खबर यह है कि भारत ने सिंधु जल समझौते के कुछ जरूरी प्रावधानों को फिलहाल के लिए सस्पेंड करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इसके पीछे की बड़ी वजह है पाकिस्तान की नीयत। दरअसल, भारत जब भी अपनी नदियों पर बिजली प्रोजेक्ट बनाता है (जैसे किशनगंगा या रतले), पाकिस्तान बेवजह रोड़े अटकाना शुरू कर देता है। ऊपर से सीमा पार से हो रही आतंकी घटनाएं आग में घी का काम कर रही हैं।

क्यों अहम है भारत का यह फैसला?
1960 में हुआ सिंधु जल समझौता दुनिया के सबसे पुराने संधियों में से एक है, जो युद्धों के बावजूद बना रहा। लेकिन भारत का अब यह मानना है कि जब पाकिस्तान हमारे लोगों का खून बहाना बंद नहीं कर रहा, तो हम उसके साथ पानी बांटने की तकनीकी बैठकों में क्यों बैठें?

भारत ने नोटिस भेजकर यह साफ कर दिया है कि वह इस 64 साल पुराने समझौते का "रिव्यू" यानी समीक्षा करना चाहता है। भारत की मांग है कि बदले हुए हालात और बार-बार उठने वाले विवादों को देखते हुए इस समझौते की शर्तों को दोबारा लिखा जाना चाहिए।

क्या पाकिस्तान के पास विकल्प है?
सच कहें तो पाकिस्तान की कृषि और अर्थव्यवस्था काफी हद तक इन नदियों पर टिकी है। अगर भारत अपनी नदियों के पानी का इस्तेमाल पूरी तरह से करने लगा या समझौते की शर्तों को कड़ा कर दिया, तो पाकिस्तान के सामने 'सूखे' और 'भुखमरी' का बड़ा संकट खड़ा हो सकता है।

यह कदम भारत की उस डिप्लोमेसी का हिस्सा है, जिसे "वाटर डिप्लोमेसी" कहा जाता है। यानी गोली और पत्थर का जवाब अब नदियों के बहाव से दिया जाएगा। भारत की यह चुप्पी तोड़ना एक संकेत है कि भविष्य में पाकिस्तान के लिए हालात और भी चुनौतीपूर्ण होने वाले हैं।