India-US Trade Deal 2026 : आखिर क्यों भारत ने अपने कृषि सेक्टर पर लगा रखा है ताला? अमेरिका के दबाव के बीच लिया बड़ा फैसला

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News India Live, Digital Desk: भारत और अमेरिका के बीच चल रही ऐतिहासिक व्यापार वार्ता (Trade Deal) में एक बात शीशे की तरह साफ हो गई है भारत अपनी खेती और किसानों के हितों से कोई समझौता नहीं करेगा। 2026 के ताजा व्यापार समझौतों के बीच यह रिपोर्ट सामने आई है कि भारत ने अपने कृषि क्षेत्र (Agriculture Sector) को बड़े पैमाने पर विदेशी प्रतिस्पर्धा के लिए 'बंद' रखने का फैसला किया है।

अमेरिका की क्या थी डिमांड?

वाशिंगटन लंबे समय से भारत पर दबाव बना रहा है कि वह अमेरिकी डेयरी उत्पादों, सेब, अखरोट और अन्य कृषि वस्तुओं के लिए अपने बाजार खोले। अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधियों का तर्क है कि भारत में उच्च आयात शुल्क (Import Duty) उनके किसानों को नुकसान पहुंचा रहा है।

भारत के 'नो' के पीछे की 3 बड़ी वजहें:

खाद्य सुरक्षा (Food Security): भारत अपनी 1.4 अरब की आबादी के लिए आत्मनिर्भर रहना चाहता है।

किसानों की आय: विदेशी सस्ते उत्पादों की एंट्री से स्थानीय किसानों (Small Farmers) की आजीविका पर संकट आ सकता है।

वोट बैंक और ग्रामीण अर्थव्यवस्था: भारत की एक बड़ी आबादी सीधे तौर पर कृषि से जुड़ी है, जिसे सरकार किसी भी कीमत पर नाराज नहीं करना चाहती।

ट्रेड डील में और क्या है खास?

भले ही कृषि क्षेत्र में सख्ती बरती गई हो, लेकिन अन्य क्षेत्रों में नरमी के संकेत हैं।

IT और डिजिटल सर्विस: भारत को उम्मीद है कि कृषि पर कड़े रुख के बदले अमेरिका आईटी सेवाओं और पेशेवरों के लिए नियमों में ढील देगा।

हाई-टेक मैन्युफैक्चरिंग: सेमीकंडक्टर और डिफेंस सेक्टर में सहयोग को प्राथमिकता दी जा रही है।"भारत का बाजार दुनिया के लिए खुला है, लेकिन हमारी कृषि नीति केवल व्यापार पर नहीं, बल्कि करोड़ों परिवारों के अस्तित्व पर टिकी है।"  सूत्रों के हवाले से सरकारी रुख

भविष्य की चुनौतियां

विशेषज्ञों का मानना है कि कृषि सेक्टर को पूरी तरह प्रोटेक्ट (Protect) करना कूटनीतिक रूप से चुनौतीपूर्ण हो सकता है। यदि अमेरिका को कृषि में रियायत नहीं मिलती, तो वह भारतीय स्टील या एल्युमीनियम पर जवाबी टैरिफ लगा सकता है।