India-Pakistan Visa Dispute: पिता आखिरी बार देखना चाहते थे बेटे का चेहरा, पाकिस्तान ने नहीं दिया वीजा

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News India Live, Digital Desk : भारत और पाकिस्तान के बीच चल रहे कूटनीतिक तनाव का खामियाजा अब आम नागरिकों और उनके परिवारों को भुगतना पड़ रहा है। एक दिल दहला देने वाले मामले में, एक भारतीय नागरिक ने पाकिस्तान सरकार पर आरोप लगाया है कि उसे अपने बीमार पिता से मिलने के लिए जानबूझकर वीजा (Visa) देने से इनकार किया गया। अब जबकि उसके पिता का निधन हो चुका है, बेटा अपने देश की मिट्टी में उन्हें अंतिम विदाई भी नहीं दे सका।

क्या है पूरा मामला? एक बेटे की बेबसी

अंशुमान (Anshuman) नामक एक भारतीय नागरिक ने सोशल मीडिया और मीडिया प्लेटफॉर्म्स के जरिए अपना दर्द साझा किया है। अंशुमान के पिता पाकिस्तान में थे और लंबे समय से गंभीर रूप से बीमार थे। अंशुमान ने कई बार पाकिस्तानी उच्चायोग (Pakistan High Commission) के चक्कर काटे और मानवीय आधार पर वीजा की गुहार लगाई, ताकि वह अपने पिता की अंतिम घड़ी में उनके पास रह सके।

अंशुमान का आरोप है कि उन्होंने सभी जरूरी दस्तावेज और मेडिकल रिपोर्ट पेश की थीं, लेकिन पाकिस्तानी अधिकारियों ने बिना कोई ठोस कारण बताए बार-बार उनके आवेदन को ठुकरा दिया।

"पाकिस्तान ने जानबूझकर रोका" - पीड़ित का बड़ा आरोप

पीड़ित बेटे का कहना है कि यह केवल प्रशासनिक देरी नहीं, बल्कि जानबूझकर किया गया कृत्य है। उन्होंने कहा, "मेरे पिता का स्वास्थ्य हर दिन गिर रहा था, मैंने पाकिस्तानी दूतावास से मिन्नतें कीं, लेकिन उनके दिल नहीं पसीजे। पाकिस्तान सरकार ने जानबूझकर वीजा देने में देरी की ताकि मैं अपने परिवार से न मिल सकूँ।"

दुखद बात यह रही कि वीजा के इंतजार के दौरान ही अंशुमान के पिता ने दम तोड़ दिया। अब अंशुमान ने पाकिस्तान की इस 'क्रूरता' को अंतरराष्ट्रीय मंच पर उठाने की बात कही है।

मानवीय आधार पर वीजा नीति पर उठे सवाल

यह मामला उन हजारों परिवारों की याद दिलाता है जो 1947 के बंटवारे के बाद दोनों देशों में बंट गए थे। हालांकि दोनों देशों के बीच 'धार्मिक तीर्थयात्रा' के लिए वीजा के कुछ नियम हैं, लेकिन 'इमरजेंसी फैमिली विजिट' (Emergency Family Visit) के मामलों में अक्सर कूटनीतिक तनाव आड़े आ जाता है।

विशेषज्ञों का कहना है कि राजनीतिक मतभेदों के बावजूद, मानवीय आधार (Humanitarian Grounds) पर परिवारों को मिलने की अनुमति दी जानी चाहिए, जैसा कि अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संधियों में भी उल्लेखित है।

सोशल मीडिया पर फूट रहा है लोगों का गुस्सा

इस खबर के सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर लोग पाकिस्तान सरकार की आलोचना कर रहे हैं। मानवाधिकार कार्यकर्ताओं का कहना है कि वीजा को एक हथियार की तरह इस्तेमाल करना निंदनीय है। पीड़ित परिवार अब भारत सरकार से मांग कर रहा है कि इस मुद्दे को कूटनीतिक स्तर पर पाकिस्तान के सामने मजबूती से रखा जाए ताकि भविष्य में किसी और बेटे को ऐसी बेबसी का सामना न करना पड़े।