मिडिल ईस्ट संकट के बीच पड़ोसियों का सहारा बना भारत बांग्लादेश, श्रीलंका और मालदीव ने मांगी तेल की मदद
News India Live, Digital Desk: पश्चिम एशिया (Middle East) में जारी तनाव और युद्ध जैसी स्थितियों ने वैश्विक ऊर्जा बाजार में खलबली मचा दी है। इस संकट के बीच भारत के पड़ोसी देशों बांग्लादेश, श्रीलंका और मालदीव की मुश्किलें बढ़ गई हैं। इन तीनों देशों ने ईंधन की भारी किल्लत को देखते हुए भारत से पेट्रोलियम उत्पादों, विशेष रूप से डीजल की आपूर्ति के लिए गुहार लगाई है।
होरमुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में तनाव का असर ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच बढ़ते टकराव के कारण दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्ग, होरमुज जलडमरूमध्य, लगभग ठप हो गया है। इस रास्ते से दुनिया का करीब 20% कच्चा तेल गुजरता है। इस मार्ग के बाधित होने से पड़ोसी देशों में पेट्रोल-डीजल की हाहाकार मचने की आशंका है, जिसके बाद उन्होंने नई दिल्ली की ओर रुख किया है।
विदेश मंत्रालय (MEA) का क्या है स्टैंड? गुरुवार को साप्ताहिक ब्रीफिंग के दौरान विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रंधीर जायसवाल ने पुष्टि की कि भारत को इन देशों से औपचारिक अनुरोध प्राप्त हुए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया:
बांग्लादेश की मांग: ढाका ने विशेष रूप से डीजल की अतिरिक्त आपूर्ति मांगी है। भारत पहले से ही असम की 'नुमालीगढ़ रिफाइनरी' से पाइपलाइन (India-Bangladesh Friendship Pipeline) के जरिए डीजल भेज रहा है।
श्रीलंका और मालदीव: इन दोनों देशों ने भी ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए भारत से मदद मांगी है।
भारत की प्राथमिकता: रंधीर जायसवाल ने कहा कि भारत एक प्रमुख निर्यातक है, लेकिन किसी भी देश को तेल देने से पहले अपनी घरेलू जरूरतों, रिफाइनिंग क्षमता और स्टॉक की उपलब्धता का गहन आकलन करेगा।
कूटनीतिक स्तर पर सक्रियता इस बीच, भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने ईरान के विदेश मंत्री के साथ कई दौर की बातचीत की है। इस चर्चा का मुख्य केंद्र 'शिपिंग की सुरक्षा' और 'भारत की ऊर्जा सुरक्षा' रहा है। भारत यह सुनिश्चित करना चाहता है कि वैश्विक संकट के बावजूद देश के अंदर तेल की कीमतों और आपूर्ति पर कोई प्रतिकूल प्रभाव न पड़े।
पड़ोसी देशों के लिए 'लाइफलाइन' है भारत भारत अपनी 'नेबरहुड फर्स्ट' (Neighbourhood First) नीति के तहत हमेशा संकट के समय पड़ोसियों के साथ खड़ा रहा है। 2017 से चालू भारत-बांग्लादेश फ्रेंडशिप पाइपलाइन इसका बड़ा उदाहरण है। हाल ही में 5,000 टन डीजल की एक खेप बांग्लादेश भेजी भी गई है, जो वहां के बिजली और परिवहन क्षेत्र के लिए संजीवनी साबित हो रही है।