भारत और यूरोप अब सिर्फ़ दोस्त नहीं, स्ट्रैटेजिक पार्टनर हैं हम उर्सुला वॉन डेर लेन का बड़ा बयान
News India Live, Digital Desk: आज के समय में दुनिया का कोई भी बड़ा मंच हो, वहां भारत की मौजूदगी के बिना बात अधूरी लगती है। हम अक्सर सुनते हैं कि भारत की साख दुनिया में बढ़ रही है, लेकिन जब यूरोप जैसे शक्तिशाली क्षेत्र का मुखिया यह कहे कि "भारत हमारा सबसे अहम साथी है," तो बात में वाक़ई वज़न आ जाता है।
यूरोपीय आयोग (European Commission) की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेन ने हाल ही में भारत और यूरोपीय संघ (EU) के रिश्तों पर जो कुछ कहा, उसने साबित कर दिया है कि अब दुनिया भारत को एक 'पावरहाउस' के रूप में देख रही है। आइए आसान भाषा में समझते हैं कि उनकी बातों के मायने क्या हैं।
भारत: भरोसेमंद साथी
उर्सुला ने साफ़ शब्दों में कहा कि भारत और यूरोपीय यूनियन "स्वाभाविक भागीदार" (Natural Partners) हैं। इसका सीधा मतलब यह है कि हम दोनों की सोच काफी मिलती-जुलती है। जैसे भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है, वैसे ही यूरोप भी लोकतंत्र और आज़ादी में विश्वास रखता है। आज की दुनिया में, जहाँ कई देश नियमों को तोड़-मरोड़ रहे हैं, वहां भारत और यूरोप का साथ आना स्थिरता के लिए बहुत जरूरी है।
सिर्फ़ बातें नहीं, काम की पार्टनरशिप
यह दोस्ती सिर्फ़ हाथ मिलाने तक सीमित नहीं है। उर्सुला वॉन डेर लेन का जोर इस बात पर था कि अब हमें मिलकर काम करना होगा। वो तीन बड़े क्षेत्रों की बात कर रही थीं:
- व्यापार (Trade): यूरोप भारत के साथ व्यापार बढ़ाना चाहता है। हम सब जानते हैं कि फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) पर बात चल रही है, जिससे भारत का सामान यूरोप में आसानी से बिक सकेगा।
- टेक्नोलॉजी (Technology): आज का युग डिजिटल है। यूरोप चाहता है कि भारत के टैलेंट और उनकी तकनीक मिल जाए, तो कमाल हो सकता है। इसके लिए एक खास 'ट्रेड एंड टेक्नोलॉजी काउंसिल' भी बनाई गई है।
- क्लाइमेट चेंज (Climate Change): प्रदूषण और मौसम का बदलाव पूरी दुनिया की समस्या है। यूरोप मानता है कि भारत के बिना इस लड़ाई को नहीं जीता जा सकता। सौर ऊर्जा (Solar Energy) और ग्रीन हाइड्रोजन में साथ काम करने पर उनका पूरा फोकस है।
समय की मांग
इस बयान को अगर हम जियो-पॉलिटिक्स (भू-राजनीति) के चश्मे से देखें, तो यह और भी साफ़ हो जाता है। रूस-यूक्रेन युद्ध और चीन के बढ़ते दखल के बीच, यूरोप को एक ऐसे साथी की तलाश है जो मजबूत भी हो और भरोसेमंद भी। और भारत इस कसौटी पर बिल्कुल खरा उतरता है।