शिवजी को जल चढ़ाते समय न करें ये गलती जानें किस धातु के लोटे से जलाभिषेक करना होता है सबसे शुभ
News India Live, Digital Desk: हिंदू धर्म में महादेव को 'भोलेनाथ' कहा जाता है क्योंकि वे मात्र एक लोटा जल से भी प्रसन्न हो जाते हैं। हालांकि, तंत्र शास्त्र और पुराणों के अनुसार, जलाभिषेक के दौरान इस्तेमाल की जाने वाली धातु का हमारे जीवन और मनोकामनाओं पर गहरा प्रभाव पड़ता है। ज्योतिषविदों के अनुसार, अनजाने में गलत बर्तन का चुनाव आपकी भक्ति में बाधा बन सकता है।
किस धातु के बर्तन से क्या मिलता है फल?
शास्त्रों के अनुसार, अलग-अलग धातुओं के पात्र से जल चढ़ाने का महत्व इस प्रकार है:
तांबे का पात्र (Copper Vessel): जलाभिषेक के लिए तांबे को सबसे उत्तम माना गया है। तांबे के लोटे से जल चढ़ाने से आरोग्य की प्राप्ति होती है और सूर्य दोष शांत होता है।
सावधान: तांबे के पात्र में कभी भी दूध डालकर शिवजी को अर्पित न करें, यह जहर के समान माना जाता है।
चांदी का पात्र (Silver Vessel): यदि आप मानसिक शांति या एकाग्रता चाहते हैं, तो चांदी के लोटे से जलाभिषेक करें। यह चंद्रमा को मजबूत करता है और सुख-समृद्धि लाता है।
पीतल का पात्र (Brass Vessel): पीतल के बर्तन से जल या दूध चढ़ाना भी शुभ माना जाता है। इससे गुरु (बृहस्पति) ग्रह अनुकूल होता है और सौभाग्य बढ़ता है।
सोने का पात्र (Gold Vessel): विशेष अनुष्ठानों में सोने के पात्र का उपयोग किया जाता है, जो वंश वृद्धि और राजयोग के लिए फलदायी माना गया है।
भूलकर भी न करें 'स्टील' और 'लोहे' का प्रयोग
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पूजा-पाठ में स्टील, लोहा या एल्युमीनियम के बर्तनों का उपयोग वर्जित है। लोहे पर राहु-शनि का प्रभाव माना जाता है, जो महादेव की शांत पूजा में नकारात्मकता ला सकता है। हमेशा प्राकृतिक धातुओं को ही प्राथमिकता दें।
जलाभिषेक की सही विधि (Step-by-Step Vidhi)
दिशा का ध्यान: जल अर्पित करते समय हमेशा उत्तर दिशा की ओर मुख करके खड़े हों। यह दिशा शिव और शक्ति की मानी जाती है। पूर्व की ओर मुख करना भी शुभ है, लेकिन पश्चिम या दक्षिण की ओर मुख करके जल न चढ़ाएं।
धारा का वेग: जल हमेशा पतली और धीमी धारा में चढ़ाना चाहिए। एकदम से सारा जल शिवलिंग पर न उड़ेलें।
अर्घ्य न लांघें: ध्यान रखें कि शिवलिंग की जलहरी (जहाँ से जल नीचे गिरता है) को कभी भी पार न करें। वहां से लौट आएं।
महामृत्युंजय मंत्र: जल चढ़ाते समय 'ॐ नमः शिवाय' या 'महामृत्युंजय मंत्र' का जाप करना अनंत फलदायी होता है