शेख हसीना का वार और यूनुस सरकार का पलटवार ,बांग्लादेश की राजनीति में फिर मच गया तूफ़ान
News India Live, Digital Desk: बांग्लादेश में लगा था कि सत्ता परिवर्तन के बाद शायद शांति लौट आएगी, लेकिन ऐसा होता दिख नहीं रहा। वहां की राजनीति एक बार फिर गर्मा गई है। वजह हैं पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना। देश छोड़ने के बाद पहली बार शेख हसीना की तरफ से कुछ ऐसी बातें सामने आई हैं, जिसने मौजूदा मोहम्मद यूनुस सरकार को न सिर्फ़ हैरान किया है, बल्कि उन्हें गहरा 'अपमान' (Insult) भी महसूस कराया है।
हसीना ने ऐसा क्या कह दिया?
मामला बड़ा दिलचस्प है। शेख हसीना, जो इस वक़्त देश से बाहर हैं, चुप नहीं बैठी हैं। हाल ही में उन्होंने जिस तरह से अपनी चुप्पी तोड़ी और मौजूदा हालात पर टिप्पणी की, उसने ढाका में बैठे हुक्मरानों के कान खड़े कर दिए हैं। खबरों की मानें तो हसीना ने यह साफ़ संकेत दिया है कि उन्हें हटाया जाना एक साज़िश थी और मौजूदा सरकार की वैधता पर उन्होंने सवाल उठाए हैं। उनका यह कहना कि "सरकार को ऐसे नहीं चलाया जा रहा है जैसे चाहिए," यूनुस प्रशासन को सीधे तौर पर चुभ गया है।
यूनुस सरकार बोली- "यह तो हद है!"
शेख हसीना के बयानों पर प्रतिक्रिया देते हुए बांग्लादेश की अंतरिम सरकार ने सख्त ऐतराज जताया है। सरकार के नुमाइंदों का कहना है कि वे इन बातों से बेहद "हैरान और अपमानित" महसूस कर रहे हैं। उनका मानना है कि जिस नेता को जनता के भारी विरोध के बाद देश छोड़ना पड़ा, वो अब बाहर बैठकर देश की नई व्यवस्था को अस्थिर करने की कोशिश कर रही है।
यूनुस सरकार का तर्क है कि वे देश को पटरी पर लाने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन पुरानी बातें और हसीना के बयान जनता के बीच भ्रम (Confusion) पैदा कर रहे हैं। इसे वे एक तरह से देश की नई शुरुआत का अपमान मान रहे हैं।
सिर्फ बयान नहीं, यह वर्चस्व की लड़ाई है
अगर हम इस पूरी घटना को बारीकी से देखें, तो यह सिर्फ शब्दों का खेल नहीं है। यह इस बात का संकेत है कि शेख हसीना ने अभी हार नहीं मानी है। वे अपने समर्थकों को यह सन्देश देना चाहती हैं कि कहानी अभी ख़त्म नहीं हुई है। वहीं, नोबेल विजेता मोहम्मद यूनुस के लिए चुनौती दोहरी है—एक तरफ देश की बिगड़ी अर्थव्यवस्था और कानून व्यवस्था को संभालना, और दूसरी तरफ शेख हसीना के सियासी हमलों का जवाब देना।
आगे क्या होगा?
बांग्लादेश के आम लोग इस समय सबसे ज्यादा पिस रहे हैं। एक तरफ उन्हें नई सरकार से उम्मीदें हैं, तो दूसरी तरफ पुरानी सरकार की परछाई अभी भी उनका पीछा नहीं छोड़ रही। शेख हसीना का यह नया "विस्फोट" यह बताता है कि आने वाले दिन बांग्लादेश की राजनीति के लिए काफी उथल-पुथल वाले हो सकते हैं। दोनों पक्षों के बीच की यह तल्खी जल्दी कम होती नहीं दिख रही।