सऊदी और यूएई के बीच बढ़ती तनातनी? जानिए इस बड़ी जंग में पाकिस्तान की नई पॉकेट पॉलिटिक्स
News India Live, Digital Desk : खाड़ी देशों (Middle East) की राजनीति को समझना अक्सर शतरंज के खेल जैसा लगता है, जहाँ एक चाल पूरी बाजी पलट सकती है। हाल ही में यमन के एक पोर्ट पर हुए हमले ने न केवल क्षेत्रीय सुरक्षा को खतरे में डाल दिया, बल्कि पुराने दोस्तों के बीच के समीकरण भी खोलकर रख दिए हैं। इस पूरे घटनाक्रम में सबसे ज्यादा चर्चा पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के उस बयान की हो रही है, जो उन्होंने सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान (MBS) के समर्थन में दिया है।
मामला क्या है?
यमन के बंदरगाह पर हुए हम ले के बाद खाड़ी देशों में तनाव का माहौल है। ऐसे में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने फौरन सऊदी क्राउन प्रिंस को फोन मिलाया और उन्हें 'पूर्ण एकजुटता' (Complete Solidarity) का भरोसा दिलाया। वैसे तो पाकिस्तान और सऊदी अरब की दोस्ती दशकों पुरानी है, लेकिन इस बार का यह समर्थन इसलिए चर्चा में है क्योंकि इसमें सऊदी और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के बीच के उन सूक्ष्म मतभेदों की झलक मिल रही है, जो पिछले कुछ समय से अंतरराष्ट्रीय मंच पर महसूस किए जा रहे हैं।
शहबाज शरीफ का रुख और कूटनीति
पाकिस्तान इस समय आर्थिक रूप से काफी कठिन दौर से गुजर रहा है और उसके लिए सऊदी अरब एक 'बड़े भाई' और 'फाइनेंशियल संकटमोचक' की तरह रहा है। जब शहबाज शरीफ सऊदी प्रिंस के साथ खड़े होने की बात करते हैं, तो वह न केवल सुरक्षा चिंताओं को साझा कर रहे होते हैं, बल्कि यह भी संकेत दे रहे होते हैं कि खाड़ी की इस जटिल राजनीति में पाकिस्तान का झुकाव किस तरफ ज्यादा है।
यमन पोर्ट स्ट्राइक के बाद सऊदी की प्रतिक्रिया और सुरक्षा को लेकर पाकिस्तान का यह खुला समर्थन उन खबरों के बीच आया है, जिसमें यूएई और सऊदी के रणनीतिक रास्तों में थोड़ा फर्क दिखने की बात कही जा रही थी।
क्यों अहम है ये समय?
आज यानी साल 2026 की शुरुआत में, जब पूरी दुनिया तेल की कीमतों और व्यापारिक मार्गों की सुरक्षा को लेकर फिक्रमंद है, तब खाड़ी में किसी भी तरह का असंतुलन सीधे तौर पर एशियाई देशों पर असर डालता है। पाकिस्तान ने इस मौके पर अपनी स्थिति साफ कर दी है। कूटनीतिक हलकों में इसे एक साहसिक कदम माना जा रहा है क्योंकि पाकिस्तान को अक्सर सऊदी और यूएई के बीच संतुलन बनाने की जद्दोजहद करनी पड़ती है।