इलाज के बहाने धर्म का सौदा? लखनऊ KGMU में डॉक्टर चला रहे थे कन्वर्जन गैंग, बस्ती और आगरा तक जुड़े तार
News India Live, Digital Desk: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से एक बेहद चौंकाने वाली खबर सामने आई है। अस्पताल को हम भगवान का दूसरा घर मानते हैं क्योंकि वहां जिंदगी बचाई जाती है। लेकिन अगर आपको पता चले कि इसी "इलाज के मंदिर" में कुछ लोग इलाज नहीं, बल्कि धर्म बदलवाने का "धंधा" चला रहे हैं, तो आपका क्या रिएक्शन होगा?
लखनऊ के प्रतिष्ठित किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) में कुछ ऐसा ही मामला सामने आया है, जिसने प्रशासन से लेकर आम जनता तक सबको हिला कर रख दिया है।
डॉक्टरों के 'सफेद कोट' पर लगे गंभीर आरोप
खबर यह है कि KGMU में काम करने वाले कुछ रेजिडेंट डॉक्टर्स पर आरोप लगा है कि वे एक "धर्मांतरण गैंग" (Religion Conversion Gang) चला रहे थे। सुनकर यकीन करना मुश्किल होता है, लेकिन शुरुआती जांच में जो बातें सामने आ रही हैं, वो काफी गंभीर हैं।
बताया जा रहा है कि ये डॉक्टर्स अपने रसूख और पद का फायदा उठाकर लोगों को, खास तौर पर जो कमजोर तबके से आते हैं या अस्पताल के स्टाफ हैं, उन्हें अपना धर्म बदलने के लिए ब्रेनवॉश कर रहे थे।
बस्ती और आगरा तक फैला नेटवर्क
यह मामला सिर्फ लखनऊ तक सीमित नहीं है। जैसे-जैसे परतें खुल रही हैं, पता चल रहा है कि इस गैंग के तार यूपी के अन्य जिलों जैसे बस्ती (Basti) और आगरा (Agra) तक जुड़े हुए हैं।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, जांच एजेंसियों को सुराग मिले हैं कि एक पूरा सिंडिकेट काम कर रहा था। इसमें बस्ती और आगरा के भी कुछ लोगों के नाम सामने आ रहे हैं जो इन रेजिडेंट डॉक्टर्स के संपर्क में थे। यानी, यह कोई छोटी-मोटी घटना नहीं, बल्कि एक सुनियोजित साजिश लग रही है।
कैसे हुआ खुलासा?
दरअसल, कुछ समय से दबी जुबान में बातें हो रही थीं कि अस्पताल परिसर के अंदर कुछ "अजीब गतिविधियां" चल रही हैं। जब शिकायतें बढ़ीं और मामला प्रशासन की नजर में आया, तो हड़कंप मच गया। अब पुलिस और खुफिया एजेंसियां (Intelligence Agencies) इस एंगल से जांच कर रही हैं कि आखिर यह नेक्सस कितने दिनों से चल रहा था?
यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या मरीजों का इस्तेमाल इस काम के लिए किया जा रहा था? क्या इलाज की आड़ में किसी तरह का लालच या दबाव बनाया जा रहा था?
प्रशासन सख्त, कार्रवाई शुरू
मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन पूरी तरह सख्त मूड में है। आरोपी डॉक्टरों की भूमिका की जांच की जा रही है। लोगों का कहना है कि अगर रक्षक ही भक्षक बन जाएंगे और डॉक्टर जैसा पढ़ा-लिखा वर्ग ऐसी गतिविधियों में शामिल होगा, तो समाज किस पर भरोसा करेगा?
अब सबकी निगाहें पुलिस की फाइनल रिपोर्ट पर टिकी हैं। यह देखना अहम होगा कि इस नेटवर्क के पीछे असली 'मास्टरमाइंड' कौन है और इसके तार और कहां-कहां तक फैले हैं। आप इस बारे में क्या सोचते हैं? क्या ऐसे डॉक्टरों पर कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए?