ट्रंप का आर-पार वाला अल्टीमेटम डील हो या न हो, खुलकर रहेगा होर्मुज, ईरान के साथ महासंवाद से पहले बढ़ा तनाव
News India Live, Digital Desk: दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्ग 'होर्मुज जलडमरूमध्य' (Strait of Hormuz) को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अब तक का सबसे कड़ा रुख अपना लिया है। पाकिस्तान के इस्लामाबाद में ईरान के साथ होने वाली ऐतिहासिक शांति वार्ता से ठीक पहले ट्रंप ने दोटूक कहा है कि 'डील हो या न हो', होर्मुज जलडमरूमध्य को हर हाल में और बहुत जल्द खोल दिया जाएगा। ट्रंप के इस बयान ने साफ कर दिया है कि यदि कूटनीति विफल रही, तो अमेरिका सैन्य शक्ति के इस्तेमाल से पीछे नहीं हटेगा।
'ईरान के पास कोई कार्ड नहीं बचा': ट्रंप की सीधी चेतावनी
वाशिंगटन से रवाना होते समय पत्रकारों से बातचीत में ट्रंप ने अपनी चिर-परिचित आक्रामक शैली में कहा, "हम खाड़ी (Gulf) को खोलेंगे, उनके (ईरान) साथ या उनके बिना। मुझे लगता है कि यह बहुत जल्दी होगा, और अगर ऐसा नहीं हुआ, तो हम इसे अपने तरीके से खत्म करेंगे।" ट्रंप ने दावा किया कि ईरान के पास अब बातचीत की मेज पर कोई मजबूत पत्ता नहीं बचा है, सिवाय वैश्विक तेल आपूर्ति को रोकने की उसकी धमकी के। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी सबसे बड़ी प्राथमिकता यह सुनिश्चित करना है कि ईरान कभी परमाणु हथियार हासिल न कर सके।
इस्लामाबाद में 'मेक और ब्रेक' वाली स्थिति
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की मध्यस्थता में हो रही इस वार्ता को 'मेक और ब्रेक' (बनो या बिगड़ो) वाला पल बताया जा रहा है। अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व उपराष्ट्रपति जेडी वेंस कर रहे हैं, जो जारेड कुशनर और विशेष दूत स्टीव विटकॉफ के साथ इस्लामाबाद पहुंच चुके हैं। वेंस ने संकेत दिए हैं कि यदि ईरान सद्भावना के साथ बातचीत करता है, तो अमेरिका हाथ मिलाने को तैयार है, लेकिन 'खेल' खेलने की स्थिति में परिणाम बेहद गंभीर होंगे।
होर्मुज की घेराबंदी और वैश्विक तेल संकट
दुनिया का एक-पांचवां कच्चा तेल इसी संकरे रास्ते से गुजरता है। ईरान द्वारा इसे बंद करने की कोशिशों के बाद से अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में भारी उछाल आया है। ट्रंप की चेतावनी के बाद अमेरिकी नौसेना के युद्धपोत पहले से ही क्षेत्र में तैनात हैं। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप का 'विद और विदाउट ईरान' वाला बयान इस बात का संकेत है कि अमेरिका अब 'माइन-स्वीपिंग' (बारूदी सुरंग हटाने) और टैंकरों को सुरक्षा देने के लिए सीधा ऑपरेशन शुरू कर सकता है।
क्या झुकने को मजबूर होगा तेहरान?
ईरान का एक बड़ा प्रतिनिधिमंडल, जिसमें संसद अध्यक्ष मोहम्मद बागेर गालिबफ और विदेश मंत्री अब्बास अरागची शामिल हैं, पहले ही इस्लामाबाद पहुंच चुका है। हालांकि, ईरान ने शर्त रखी है कि जब तक उसके फ्रीज किए गए फंड्स जारी नहीं होते और लेबनान में सीजफायर नहीं होता, तब तक स्थायी समझौता मुश्किल है। लेकिन ट्रंप की 'पावर प्लांट डे' और 'ब्रिज डे' जैसी पिछली चेतावनियों के खौफ ने तेहरान को बातचीत की मेज पर आने को मजबूर कर दिया है। अब पूरी दुनिया की नजरें इस्लामाबाद के होटल सेरेना पर टिकी हैं।