IAF की ताकत में ऐतिहासिक इजाफा: भारत खरीदेगा 114 नए राफेल लड़ाकू विमान; 'मेक इन इंडिया' के तहत ₹36 लाख करोड़ के महा-सौदे को मिली मंजूरी
नई दिल्ली। भारतीय वायुसेना (IAF) को दुनिया की सबसे घातक हवाई शक्ति बनाने की दिशा में केंद्र सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। रक्षा मंत्रालय की रक्षा अधिग्रहण समिति (DAC) ने फ्रांस से 114 नए राफेल लड़ाकू विमानों की खरीद को हरी झंडी दे दी है। लगभग ₹36 लाख करोड़ की लागत वाला यह रक्षा सौदा सामरिक दृष्टि से भारत की अब तक की सबसे बड़ी डील मानी जा रही है।
यह मंजूरी ऐसे समय में आई है जब फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों 15 से 17 फरवरी तक भारत के दौरे पर हैं। अब इस फाइल को अंतिम मुहर के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी (CCS) को भेजा जाएगा।
सौदे की मुख्य शर्तें: 'मेक इन इंडिया' पर जोर
इस मेगा डील की सबसे खास बात यह है कि भारत ने इसमें अपनी घरेलू विनिर्माण क्षमता को प्राथमिकता दी है:
तैयार विमान (Fly-away condition): पहले के 36 राफेल सौदे की तर्ज पर, 114 में से शुरुआती 18 विमान सीधे फ्रांस से तैयार अवस्था में आएंगे।
भारत में निर्माण: शेष विमानों का निर्माण 'प्रौद्योगिकी हस्तांतरण' (Transfer of Technology) समझौते के तहत भारत में ही किया जाएगा। इससे न केवल वायुसेना को विमान मिलेंगे, बल्कि देश के रक्षा उद्योग को भी मजबूती मिलेगी।
बजट का बोझ: विशेषज्ञों के अनुसार, इन विमानों की आपूर्ति 5 से 7 वर्षों में होगी, जिसका अर्थ है कि सरकार को सालाना लगभग ₹50,000 करोड़ का भुगतान करना होगा, जो बजट प्रबंधन के लिहाज से संतुलित है।
वायुसेना के बेड़े में होंगे 150 राफेल
इस समझौते के पूरा होने के बाद भारतीय वायुसेना के पास राफेल विमानों की कुल संख्या 150 हो जाएगी (36 पुराने + 114 नए)। वर्तमान में वायुसेना के पास स्वीकृत 42 स्क्वाड्रनों के मुकाबले केवल 30 स्क्वाड्रन हैं। चीन और पाकिस्तान की दोहरी चुनौती (Two-front war threat) को देखते हुए वायु विशेषज्ञों का मानना है कि अगले दशक तक भारत को अपने स्क्वाड्रनों की संख्या बढ़ाकर 56 करनी होगी।
राफेल क्यों है 'गेम चेंजर'?
भारत-पाकिस्तान के हालिया संघर्ष (ऑपरेशन सिंदूर आदि) के दौरान राफेल की क्षमताओं ने दुनिया को लोहा मनवा दिया है। इसकी कुछ प्रमुख विशेषताएं इसे अद्वितीय बनाती हैं:
अत्याधुनिक हथियार: यह मेटियोर (Meteor) और स्कैल्प (SCALP) जैसी लंबी दूरी की मिसाइलों और लेजर गाइडेड बमों से लैस है।
5वीं पीढ़ी की क्षमता: हालांकि राफेल 4.5 पीढ़ी का विमान है, लेकिन इसके घातक सेंसर्स और हथियार इसे भारत के आगामी 5वीं पीढ़ी के AMCA (Advanced Medium Combat Aircraft) के विकसित होने तक एक शक्तिशाली विकल्प बनाए रखते हैं।
कड़ी प्रतिस्पर्धा: 2019 में जारी निविदा में राफेल ने अमेरिका के लॉकहीड मार्टिन, बोइंग और यूरोफाइटर टाइफून जैसे दिग्गजों को पछाड़कर अपनी श्रेष्ठता साबित की थी।
सामरिक महत्व
रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, राफेल का यह बेड़ा न केवल सीमाओं की रक्षा करेगा, बल्कि दुश्मन के इलाके में घुसकर सटीक हमला करने की भारत की क्षमता को कई गुना बढ़ा देगा। यह सौदा भारत और फ्रांस के बीच अटूट रणनीतिक साझेदारी का एक और बड़ा उदाहरण है।